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राजभर समाज ने जयंती मनाई 1

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वीरता से भरा रहा सुहेलदेव का जीवन
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वीर सुहेलदेव व लोरिक अहीर की जयंती मनाई

बखिरा। जूनियर हाईस्कूल भगवानपुर में राजभर समाज के लोगों ने वीर सुहेलदेव और लोरिक अहीर की जयंती मनाई। शहीदों की याद में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी गई।
जलसत्याग्रह आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेश राजभर ने सुहेलदेव व लोरिक अहीर के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप जलाया। कहा कि महराज सुहेलदेव का जन्म श्रावस्ती में वर्ष 1009 में बसंत पंचमी को हुआ था। 18 वर्ष की आयु में ही इनको राजसिंहासन मिल गया था। वर्ष 1077 में इनका स्वर्गारोहण हो गया था। सुहेलदेव का जीवन वीरता से भरा पड़ा है। राष्ट्रवीर महराज सुहेलदेव के साथ इतिहासकारों ने घोर अन्याय किया है। मुगलों व अंग्रेजों से लड़ाई करते हुए उनके वंशज जनजाति जैसा जीवन यापन करने लगे। उन्होंने महाराज सुहेलदेवजी के नाम से केंद्रीय आवासीय हिंदू विश्वविद्यालय बनाने की मांग की।
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राष्ट्रीय प्रवक्ता सरोजा राजभर ने कहा कि राजभर समाज ने देश हित में तमाम लड़ाइयां लड़ी हैं। आजादी में समाज का योगदान भुलाया नहीं जा सकता है। गाजीपुर का नाम सुहेलदेव के नाम से किया जाना चाहिए। इस अवसर पर प्रमोद यादव, रामानंद, रामकरन राजभर, मंगरु यादव ने भी राजभर समाज के योगदान को रेखांकित किया।
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