संतकबीरनगर। इसे लाभार्थी की सुस्ती कहें या अफसरों की लापरवाही। प्रधानमंत्री आवास निर्माण की धीमी प्रगति ने जिला स्तरीय अफसरों की परेशानी बढ़ा दी है। बजट आवंटन के बावजूद लक्ष्य और कार्यपूर्ति में अंतर के चलते अफसरों को शासन की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। हालात से नाराज सीडीओ ने सभी बीडीओ को नियमित निरीक्षण करने एवं ग्राम पंचायत सचिवों को कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।
जिले में इस वित्तीय वर्ष में पहले 2122 आवास बनाने का लक्ष्य था, जिसे बाद में दो बार बढ़ाया गया। पिछले वित्तीय वर्षों में भी स्वीकृत आवासों की संख्या बढ़ाई गई। इस तरह कुल 17001 आवास का निर्माण इस वर्ष कराया जाना है। इसके सापेक्ष अभी 16849 आवासों के लाभार्थियों का ही खाता सत्यापित हुआ है। इनमें से 16736 लाभार्थियों के खाते में प्रथम किस्त की धनराशि जा चुकी है। 13439 लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्हें पिछले महीने ही तीसरी किस्त भी मिल गई थी, लेकिन उनमें से अभी 13166 लोगों का ही आवास पूर्ण हुआ है। सबसे अधिक सुस्ती दूसरी व तीसरी किस्त के बीच है।
निरीक्षण की कमी से हो रही देरी
आवास निर्माण में देरी की वजह नियमित निरीक्षण नहीं होना बताया जा रहा है। डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद कुमार यादव का कहना है कि लाभार्थी के खाते में धन पहुंचने व उसके बाद कार्य शुरू होने की निगरानी का जिम्मा ग्राम पंचायत सचिवों का है, लेकिन वे समय से इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। बार-बार रिमाइंडर भेजने पर भी कार्य में तेजी नहीं आ रही है।
सभी बीडीओ को भेजा गया है पत्र : सीडीओ
सीडीओ हाकिम सिंह का कहना है कि जिले को प्रधानमंत्री आवास निर्माण के मद में मिले बजट के अनुरूप कार्य कराने के लिए बार-बार दबाव बनाना आश्चर्यजनक है। लोगों को खुद ही अपना घर जल्दी बनाने की चिंता होनी चाहिए। इस बार सभी बीडीओ को पत्र भेजकर कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि जिन्हें तीसरी किस्त मिल गई है, उनमें से बचे 273 लोगों का मकान इस महीने जरूर बन जाए।