संतकबीरनगर। वर्ष 1974 से प्रत्येक वर्ष पांच जून को विश्व प्रर्यावरण दिवस मनाया जाता है। प्रदूषण पर रोक लगाने की बड़ी- बड़ी बातें भी होती है,लेकिन जिले में प्रदूषण पर रोक लगाए जाने की कवायद सफल नहीं हो पा रही है। सबसे अधिक खतरा प्लास्टिक प्रदूषण का उत्पन्न हो गया है। शहर से निकलने वाला कूड़ा हाईवे के किनारे गिराया जाता है। आमी नदी का पानी भी दूषित है। सीएम योगी आदित्य नाथ ने कबीर चौरा परिसर के भ्रमण के दौरान आमी नदी के पानी में गंदा पानी गिराए जाने पर रोक लगाने के निर्देश के साथ सफाई कराए जाने पर जोर भी दिया था। बावजूद इसके अभी तक इस पर अमल शुरू नहीं हुआ।
नगर पालिका परिषद खलीलाबाद क्षेत्र में प्रत्येक महीने 15 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। नगर क्षेत्र से निकलने वाले कूडे़ के निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं है। वैसे नगर पालिका प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है कि औद्योगिक नगर में स्थान चिहिन्त कर शहर से निकलने वाला कूड़ा वहीं गिराया जाता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। चोरी छिपे अब भी शहर से निकलने वाला कूड़ा बरदहिया के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे व मड़या जाने वाले मार्ग पर गिराया जाता है। इसका खामियाजा हाईवे से होकर गुजरने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे रहने वाले लोगों को अधिक दिक्कते हो रही है। डीएओ केडी सिंह ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। अधिक प्रकृति का विदोहन करने की वजह से समस्या उत्पन्न हो रही है। फर्टिलाइजर का पानी नदियो में गिराए जाने से पानी दूषित हो रहा है। इलेक्ट्रानिक प्रदूषण का भी खतरा मंडराने लगा है। इस पर रोक लगाने की दिशा में सार्थक कदम उठाने की जरूरत है। पिछले वर्ष तीन लाख छह हजार पौधे लगाए गए थे। जबकि इस वर्ष छह लाख तीस हजार पौधे लागए जाने का लक्ष्य निर्धारित है। एक व्यक्ति एक वृक्ष योजना और वृक्ष भंडारा के अंतर्गत तमाम संगठनों, समाजसेवियों की मदद से पर्यावरण को बचाए रखने के लिए प्रयास होगा। विधायक सदर दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे ने बताया कि प्रदूषण से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाएं जाएंगे। आमी नदी में गंदा पानी नहीं गिरने पाएगा। शहर क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण का स्थाई निदान कराए जाने की दिशा में पहल होगी। प्रत्येक व्यक्ति को एक पौध लगाना चाहिए, जिसे पर्यावरण शुद्ध कर सकें। चेयरमैन खलीलाबाद श्याम सुंदर वर्मा ने बताया कि शहर में कूड़ा निस्तारण की योजना बन रही है। अस्थाई तौर पर औद्योगिक नगर में व्यवस्था की गई है। शहर से दूर कूड़ा निस्तारण प्रबंधन की व्यवस्था कराई जाएगी। हर व्यक्ति कम से कम एक पौधे लगाए और अपने घर के आस-पास सफाई पर ध्यान दे और प्लास्टिक के उपयोग से बचे। तभी प्लास्टिक प्रदूषण के खतरे से बचा जा सकता है। ईओ बीना सिंह ने बताया कि नगर क्षेत्र से निकलने वाले कूडे़ का अस्थाई समाधान किया जा रहा है,लेकिन उसमें उतनी सफलता नहीं मिल पा रही है। ऐसे में स्थाई निदान की ओर ध्यान दिया जा रहा है। वैसे प्लास्टिक प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है,इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। इससे बचाव के लिए प्लास्टिक के उपयोग से लोगों को बचना चाहिए।