संतकबीरनगर। सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा कर रही है, वही चिकित्सकों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर डाल रहे है। जिले के सीएचसी-पीएचसी पर चिकित्सकों की लगातार कमी बनी हुई है। इसके कारण मरीजों को प्राइवेट चिकित्सकों के यहां रुख करना पड़ता है। सीएचसी और पीएचसी पर चिकित्सकों के 90 पद हैं। इनमें मात्र 77 चिकित्सक की तैनाती है। उसमें में भी 29 चिकित्सक विभिन्न कारणों से अनुपस्थित चल रहे हैं। कुल मिलाकर 51 चिकित्सकों के भरोसे ग्रामीण क्षेत्र के लोग है।
जिले में छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और दो सुपर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। इन केंद्रों पर 90 चिकित्सकों के पद है। इसमें से मात्र 77 चिकित्सक कागजों में कार्यरत है। तीन चिकित्सक लंबे समय से अवकाश पर चल रहे है, जबकि चार चिकित्सकों को जिला अस्पताल से संबद्ध कर दिया गया है। वही तीन चिकित्सक पीजी करने चले गए है। 16 चिकित्सकों ने नौकरी ही छोड़ दी है। कुल मिलाकर सीएचसी, पीएचसी पर 51 चिकित्सक की ही तैनात है। इन्हीं के भरोसे जिले की सभी सीएचसी और पीएचसी की स्वास्थ्य सेवाएं है। कुछ पीएचसी पर एक ही चिकित्सक है। इसके कारण मरीजों को काफी परेशान होना पड़ता है। गरीब मरीजों को प्राईवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। मेंहदावल कस्बे के राम प्रकाश, जयहिंद आदि का कहना है कि पीएचसी और सीएचसी पर, जो चिकित्सक तैनात है वह भी समय से नहीं आते है। जिससे जिला मुख्यालय पर लोगों को इलाज के लिए जाना पड़ता है। बखिरा के राम मिलन प्रजापति और गणेश ने बताया कि पीएचसी पर चिकित्सक है, पर इनकी संख्या बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है। यही हाल धनघटा, हैंसर, मलौली, नाथनगर, काली जगदीशपुर, बूधा कला आदि पीएचसी और सीएचसी का है। लोगों ने मांग की है कि डॉक्टरों की कमी को दूर किया जाए।
इंसेट
सीएमओ डॉ अभय चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सीएचसी, पीएचसी पर चिकित्सकों की कमी है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। शासन से जैसे ही चिकित्सक मिलते है उनकी तैनाती सीएचसी और पीएचसी पर की जाएगी। फिलहाल जितने चिकित्सक हैं उन्हीं से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।