50 हजार आबादी अब भी शुद्ध पेयजल से महरूम
शहर में एक मात्र ओवरहेड टैंक से सीमित क्षेत्र में हो रही जलापूर्ति
नई बस्ती क्षेत्र में जलापूर्ति के इंतजाम नहीं
संतकबीरनगर। शहर की 50 हजार आबादी अब भी शुद्ध पेयजल से महरूम है। कारण नगर पालिका प्रशासन सभी वार्डों में जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन ही नहीं बिछा सका है। ऐसे में शहरीयों को स्वच्छ पेयजल के लिए जूझना पड़ता है।
शहर के दो वार्डों में जलापूर्ति की व्यवस्था नहीं हो सकी है। 12 वार्डों में आधी अधूरी पाइप लाइन बिछाई गई है। नगर पालिका क्षेत्र में 25 वार्ड हैं। नगर पालिका परिषद के आंकड़ों के अनुसार सीमा विस्तार से पहले खलीलाबाद की कुल आबादी 60 हजार के करीब थी। सीमा विस्तार के बाद यह संख्या एक लाख से ऊपर पहुंच गई है।
शहर के मड़या, औद्योगिक आस्थान, बगहिया सहित नई कॉलोनियों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं है। पानी की आपूर्ति के लिए 2200 किलोलीटर की क्षमता का ओवरहेड टैंक बना है। चार नलकूप हैं। इनमें एक नलकूप खराब है। नगर पालिका प्रशासन का मानना है कि प्रति व्यक्ति औसतन 135 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है, लेकिन जो व्यवस्था है, उसमें आधी आबादी भी आच्छादित नहीं हो सकी है।
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236 इंडिया मार्का हैंडपंप में अधिकांश रिबोर लायक
नगर पालिका क्षेत्र में 236 इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें कई रिबोर कराने लायक हैं। भीषण गर्मी में पेयजल का संकट बना हुआ है। खलीलाबाद शहर के राधेश्याम, सुधीर कुमार आदि ने बताया कि जलापूर्ति की व्यवस्था सभी वार्डों में नहीं हैं। जहां आपूर्ति हो रही है, उसमें भी अक्सर दूषित पानी आता है।
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वाटर कूलर भी नहीं दे रहे राहत
लोगों को शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए डाक बंगला के सामने, समय माता मंदिर के पास व मुखलिसपुर ओवरब्रिज के नीचे वाटर कूलर लगाए गए हैं। मुखलिसपुर ओवरब्रिज के नीचे लगा वाटर कूलर अब तक संचालित नहीं हो सका है। इस पर सेतु निगम ने आपत्ति दर्ज कराई है। केवल दो वाटर कूलर ही चालू हैं, लेकिन यहां पर ठंडा पानी नहीं मिल पा रहा है।
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कोट
शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। मड़या हाईवे के उत्तरी छोर और औद्योगिक आस्थान रेलवे लाइन के दूसरे छोर पर है। इससे जलापूर्ति की पाइप लाइन नहीं डाली जा सकी है। दोनों क्षेत्रों के लिए 30-30 लाख रुपये की पेयजल परियोजना स्वीकृत है। काम भी करीब-करीब पूरा हो गया है। जल्द ही इन क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की समस्या दूर हो जाएगी। नई बसी कॉलोनियों के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
-सुरेश मौर्य, ईओ नगर पालिका