संतकबीरनगर। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत जिले के 60 गरीब परिवारों के बच्चों का चयन प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ने के लिए हुआ है। इन चयनित बच्चों की सूची विद्यालयवार बीएसए कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी गई है। स्कूल खुलते ही बच्चों का नामांकन कराया जाएगा।
सरकार ने 25 प्रतिशत गरीब परिवार के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ाने की योजना चालू की है। इसके लिए बच्चे के पिता की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए। ऐसे अभिभावकों से आवेदन मांगा गया था। करीब 160 लोगों ने आवेदन किया था। जिसका सत्यापन कराया गया। सत्यापन के बाद 60 बच्चे प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ने के लिए पात्र पाए गए। उन बच्चों को वरियता के अनुसार विद्यालय आवंटित किया गया है। जिसमें शहर के कई प्राइवेट विद्यालय शामिल हैं। बच्चों के फीस का खर्च सरकार उठाएगी। प्रति बच्चा 4500 रुपये वार्षिक फीस प्राइवेट विद्यालयों के खाते में सरकार देगी। उसके बाद प्रति वर्ष पांच हजार रुपये बच्चे को अन्य मद में खर्च के लिए सरकार उनके अभिभावक के खाते में भेजेगी। जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता रजनीश वैद्यनाथ ने बताया कि आवेदन के अनुसार कुल 60 बच्चों का चयन प्राइवेट विद्यालयों के लिए हुआ है। उन बच्चों को विद्यालय आवंटित कर दिए गए हैं और सूची बीएसए कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी गई है। उन्होंने बताया कि बच्चों की सूची विद्यालयों को भी भेज दी गई है।
मनमानी पर वापस ली जा सकती है मान्यता
गरीब परिवारों के जिन बच्चों को महंगे प्राइवेट विद्यालयों में नामांकन के लिए चयनित किया गया है उनकी सूची भी संबंधित विद्यालय के प्रबंध तंत्र को भेजते हुए शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए स्कूल का खाता नंबर मांगा गया है। बच्चों के नामांकन में आनाकानी करने या पढ़ाई के दौरान ऐसे बच्चों से भेदभाव की शिकायत पर बीएसए इसकी जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर मान्यता वापस लेने जैसी सख्त कार्रवाई भी कर सकते हैं।