प्रिय प्रधान जी.. पॉलीथिन पर रोक लगाने के लिए प्रयास करें...
- डीएम ने जिले के सभी ग्राम प्रधानों को लिखा पत्र
- गांव में अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने का दिया सुझाव
- प्लास्टिक कचरा फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई: डीएम
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक लगाने के लिए डीएम ने जिले के सभी ग्राम प्रधानों को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में प्रधानों को पंचायतीराज एक्ट की याद दिलाते हुए उनसे प्लास्टिक कचरे पर रोक लगाने की अपेक्षा की गई है। डीएम ने प्रधानों से गांव में जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को भी प्रेरित करने का सुझाव दिया है। इसके बाद भी यदि कोई व्यक्ति गांव या चौराहों पर प्लास्टिक कचरा फैलाते हुए पाया जाए तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने की अपेक्षा भी डीएम ने प्रधानों से की है। डीएम का यह पत्र कितना प्रभावी होगा तो यह तो बाद का विषय है लेकिन पत्र की चर्चा जरूर शुरू हो गई है।
प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को समाप्त करने के लिए डीएम रवीश गुप्त ने मंगलवार को जिले के सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों को पत्र भेजा है। पत्र में लिखा है कि प्लास्टिक से बने पत्तल, ग्लास, चम्मच, थैलियां जो आज बाजारों में उपलब्ध हैं, उसे किसी भी कीमत पर प्रयोग ना किया जाए। उन्होंने बताया कि वह कचरे के रूप में नाले व नदियों में जाकर जलीय जीवों के साथ ही मानव जीवन पर भी खतरा बनता है। प्लास्टिक कचरे से जल ही नहीं बल्कि मिट्टी की भी उर्वरा शक्ति कम होती है। मिट्टी में फैलने वाले प्लास्टिक प्रदूषण से कृषि योग्य भूमि भी बंजर हो जाती है जिसके चलते भविष्य में खाद्य पदार्थों का भी संकट उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा प्लास्टिक के कचरे चारों तरफ बीमारी फैला रहे हैं। प्लास्टिक गर्म होने के बाद कई हानिकारक जहरीली गैस भी छोड़ता है, जो मानव जीवन के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। डीएम रवीश गुप्त ने पत्र में सभी से आग्रह करते हुए कहा है कि प्लास्टिक को पूरी तरह से बंद करने के लिए हम सभी को एक साथ खड़े होने की आवश्यकता है। यदि ऐसा नहीं होता है तो आने वाले समय में गांव में रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इसके लिए गांव-गांव व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाए, जिससे लोग प्लास्टिक के प्रयोग को पूरी तरह से बंद करें।
000000
जन जागरूकता से बनेगी बात : डीएम
केवल कानून बनाकर इस समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा। शहर हो या गांव लोगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे खुद पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। इस कार्य में ग्राम प्रधानों की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। पंचायतीराज एक्ट में भी इस बात का उल्लेख है कि ग्राम पंचायतें ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई कर सकती हैं।
रवीश् गुप्ता- डीएम, संतकबीरनगर