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फिर बढ़ने लगा राप्ती का जलस्तर, क्षेत्रवासी चिंतित

Sun, 29 Jul 2018 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
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करमैनी-बेलौली तटबंध पर बढ़ा राप्ती का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला
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मेंहदावल। क्षेत्र में राप्ती नदी लगातार बढ़ रही है। जहां शनिवार को नदी का जलस्तर सायं चार बजे 75.60 मीटर मापा गया था, वही रविवार को नदी का जलस्तर शाम तक 76 मीटर पर पहुंच गया। वैसे तो लाल निशान से नदी का जलस्तर 3.50 मीटर नीचे है फिर भी लगातार नदी का जलस्तर बढ़ने से विभाग जहां सक्रिय है, वहीं क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ गई है।
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मेंहदावल तहसील क्षेत्र के उत्तर पूर्वी छोर पर 19.2 किमी लंबा तटबंध करमैनी-बेलौली वर्तमान समय में परियोजनाओं के अभाव मे जर्जर हालत में हैं। वर्ष 2017-18 में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर अगस्त माह में पहुंच गया था और तटबंध पर जलस्तर का भारी दबाव था, जिसके कारण नौगो, विशुनपुर, जोरवा, डुमरियाबाबू में तटबंध से पानी का रिसाव शुरू हो गया था और नौगो में तटबंध काफी दूरी तक बैठ गया था। विभाग व ग्रामीणों के सहयोग से जल के रिसाव को काफी मशक्कत के बाद रोकने में सफलता मिली थी तभी यह सवाल खडे़ हो रहे थे कि अगली बरसात में तटबंध को दुरुस्त नहीं किया गया और इसी तरह जलस्तर बढ़ा और तटबंध पर दबाव पड़ा तो बाढ़ बिकराल रूप ले सकती है। विभाग ने संवेदनशील व अतिसंवेदनशील स्थलों को चिन्हित कर परियोजना बनाकर विभागीय स्तर से जिला प्रशासन के माध्यम से शासन मे भेजा। विभागीय पहल तो हुई पर राजनीतिक पहल और उदासीनता ने परियोजना को लटका दिया। वैसे 15 लाख रुपये बाढ बचाव के नाम पर करमैनी-बेलौली तटबंध को मिले, पर अब भी तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित नही हो पाया। मैदानी व पहाड़ी क्षेत्र में चार दिनों की बरसात के चलते एक बार फिर नदी का जलस्तर बढना शुरु हो गया है। रविवार को नदी का जलस्तर 76 मीटर के करीब पहुंच गया। विभाग लगातार जलस्तर की निगरानी करा रहा है, जबकि क्षेत्र के लोग बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंतित हैं। इस संबध में अवर अभियंता वीरेंद्र यादव ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ रहा है पर तटबंध से अभी काफी दूर हैं। तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है और लगातार राप्ती के जलस्तर की निगरानी की जा रही हैं। कही से भी बाढ की आशंका अभी नही हैं।

जर्जर नटवा- मुडियारी तटबंध की मरम्मत की मांग
धनघटा। आधा-अधूरा और जर्जर नटवा मुडियारी तटबंध इस बरसात में लोगों के लिए मुसीबत बन सकती है। नाथनगर क्षेत्र के लगभग 20 गांवों को कठिनईया कुआनों नदी की विभीषिका से बचाने के लिए तेरह किलोमीटर के इस बंधे के निर्माण में जगह-जगह गैप छोड़ दिए गए हैं। रेगुलेटर लगाने के प्रस्ताव को भी विभागीय अधिकारी भूल गए। कुआनो और कठिनईया नदी के किनारे बसे मुडियारी, भीटी माफी, घोलवा, बारडीहा, शेरपुर, सुक्खी, गोपालपुर, गुरहवा, तरयापार, मठिया उर्फ अतरौलिया, भैसही जोत, गालीमपुर, हडिया, नटवा, हटवा आदि गांव में वर्ष 1998 में बाढ़ ने तबाही मचा दिया था। बाढ़ की विभिषिका झेलने के बाद सिंचाई विभाग ने इन गांवों को बचाने के लिए एक बंधे का प्रस्ताव तैयार किया था। शासन की मंजूरी मिलने के बाद 2005 में लगभग 13 किलोमीटर नटवा मुडियारी तटबंध का निर्माण कराया गया था। बंधा निर्माण के दौरान कई स्थानों पर बड़े-बड़े गैप छोड़ दिए गए। बारीडीहा और शेरपुर गांव के बीच कुआनों नदी के किनारे लगभग 500 मीटर बंधा बनाया ही नहीं गया। नटवा गांव के पास भी कठिनईया नदी के किनारे लगभग सौ मीटर लंबा गैप छोड़ा गया है। गोपालपुर और सुक्खीपुर गांव के बीच रेगुलेटर लगाने का प्रस्ताव आज तक पुरा नहीं हो पाया है। सुक्खीपुर निवासी जगदीश यादव, तरयापार निवासी ग्रीस पांडेय, भैसहीजोत निवासी प्रकाश यादव आदि का कहना है कि विभाग ने आधा अधूरा बंधे का निर्माण कराकर प्रोजेक्ट का करोड़ों का भुगतान लेकर अपना पल्ला झाड़ लिया था। ठेकेदार जबरिया किसानो के उपजाऊ खेतों की मिट्टी भी निकालवा लिया था। क्षेत्र के लोगों ने समय रहते इस जर्जर बंधे के ठीक कराने का मांग जिला प्रशासन से किया है।
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