जनपद में 312 प्राथमिक विद्यालय बगैर मान्यता के संचालित हो रहे हैं। यहीं नहीं सूत्रों के मुताबिक बिना अफसरों की शह के बगैर ऐसे स्कूल नहीं चल सकते हैं। वहीं इसके चलते परिषदीय स्कूलों में छात्र संख्या भी प्रभावित हो रही है।
नया सत्र शुरू हो चुका है। शहर में टेंपो, रिक्शा, कार आदि पर माइक लगाकर प्राईवेट विद्यालयों के संचालक प्रचार प्रसार में लग गए हैं। विद्यालयों के संचालक अभिभावकों को तमाम प्रकार के प्रलोभन दे रहे हैं। ये विद्यालय या तो किराए के मकान में है या तो टीन शेड डालकर संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से कई विद्यालयों के पास मान्यता भी नहीं है। जबकि नियमत: विद्यालय खोलने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होती है।
मान्यता के लिए आवेदन देना होता है। जिसके बाद बीएसए के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी विद्यालयों के मान्यता से संबंधित जांच करते हैं और भवन, जमीन व अन्य मानकों को जांचते हैं। इसके बाद ही मान्यता दी जाती है। विभाग ने जिले में बगैर मान्यता के लगभग 312 विद्यालयों को चिह्नित किया है। आखिर जब विद्यालय चिह्नित हो गए हैं तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही यह समझ से परे है। इन विद्यालयों के संचालित होने के चलते परिषदीय विद्यालयों की छात्र संख्या भी प्रभावित हो रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि बगैर मान्यता के चल रहे विद्यालयों में खंड शिक्षा अधिकारियों का शह होती है। अगर खंड शिक्षा अधिकारी चाहे तो उनके क्षेत्र में बगैर मान्यता के कोई भी विद्यालय संचालित नहीं हो सकते हैं।
बीएसए जगदीश प्रसाद शुक्ल ने बताया कि बगैर मान्यता के चल रहे विद्यालयों को चिह्नित किया गया है। उनके विरुद्ध जल्द ही अभियान शुरू किया जाएगा। बगैर मान्यता के विद्यालय संचालित होते पाए जाएंगे तो बेसिक शिक्षा एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए एक लाख रुपये तक अर्थदंड लगाया जाएगा। उसके बाद भी विद्यालय नहीं बंद करते है तो मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।