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मनरेगा योजना में 28,006 मजदूरों को मिल रहा रोजगार

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मनरेगा योजना में 28,006 मजदूरों को मिल रहा रोजगार
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754 में से 612 ग्राम पंचायतों में चल रहा काम, अब तक 821 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार
संतकबीरनगर। कोरोना संक्रमण के बीच बारिश के मौसम में मनरेगा योजना का काम थम गया था। इधर, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान में हो रहे काम में मनरेगा मजदूूूरों को रोजगार मिलना शुरू हो गया है। जिले की 81 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में मनरेगा काम चल रहा है और 28,006 मजदूरों को रोजगार भी मिल रहा है। वैसे अभी तक 821 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिल पाया है। यदि 81 से 99 दिन के बीच काम करने वाले मजदूर परिवारों को चिह्नित करके प्रशासन रोजगार मुहैया कराए तो यह आंकड़ा दस हजार के पार हो सकता है।
मार्च में कोरोना संक्रमण का दौर शुरू हुआ था। उस दौरान मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, गुजरात, हरियाणा से काफी संख्या में मजदूर अपने घरों को लौटे। शासन का सर्वाधिक जोर मजदूरों को मनरेगा से जोड़कर रोजगार देने का है। अप्रैल, मई और 15 जून तक प्रशासन ने मनरेगा में काम शुरू किया। उस दौरान औसतन 90 हजार मजदूर मनरेगा में काम पाए। उसके बाद बारिश का दौर शुरू हुआ तो मनरेगा में काम थम गया। इधर, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान में पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय, मुर्गी शेड, बकरी शेड, पशु शेड आदि का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें फिर मनरेगा मजदूरों को रोजगार मिलना शुरू हो गया है। पहले जिले में 794 ग्राम पंचायतें थीं, लेकिन नगरीय सीमा विस्तार और नवसृजित नगर पंचायत में 40 ग्राम पंचायतों के शामिल हो जाने से अब 754 ग्राम पंचायतें बची हैं। इनमें से 612 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का काम चल रहा है। इसमें 28,006 मजदूरों को रोजगार मिल रहा है।
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ब्लॉक 100 दिन रोजगार पाए परिवार 81 दिन से 99 दिन के बीच पाए रोजगार
बघौली 201 818
बेलहर कला 27 539
हैंसर बाजार 79 535
खलीलाबाद 10 532
मेंहदावल 144 1208
नाथनगर 105 924
पौली 59 683
सांथा 148 3587
सेमरियावां 48 874
महिला मजदूरों को काम और जागरूक करने भी जोर
मिशन शक्ति के रूप में विशेष अभियान 17 अक्तूबर से चलाया जा रहा है। वासंतिक नवरात्र अप्रैल 2021 तक यह अभियान जारी रहेगा। इसमें महिला मजदूरों को शासन की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर उठाए गए विभिन्न कदमों की 1090, 181, 102, 112 नंबरों की जानकारी दिए जाने के निर्देश हैं। आजीविका संसाधनों में वृद्धि के लिए मनरेगा में अनुमन्य कार्यों एवं परिसंपत्तियों के बारे में उन्हें जानकारी दी जानी है। महिला श्रमिक समूहों का गठन करना है। प्रत्येक ग्राम पंचायतों में महिला मजदूरों में से दो महिला मजदूूूूर व्यक्तिगत लाभार्थी मनरेगा योजना के लिए चयन करके लाभान्वित की जाएंगी। महिलाएं ग्राम संगठन स्तर पर फेरी का आयोजन, कैंडल मार्च, पंफलेट लेकर क्षेत्र में भ्रमण कर अन्य महिलाओं को जागरूक करेंगी।
कोट
मनरेगा योजना में 754 में से 612 ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। इसमें 28,006 मजदूर रोजगार पा रहे हैं। 9,700 मजदूर ऐसे हैं जो 81 से 99 दिन तक रोजगार पाए हैं। इन परिवारों को चिह्नित करके उन्हें 100 दिन का रोजगार मुहैया कराए जाने के निर्देश सभी बीडीओ और एपीओ को दिए गए हैं, ताकि 100 दिन का रोजगार पाने वालों की संख्या दस हजार के ऊपर हो जाए। यह सच है कि अभी तक 821 मजदूर परिवार ही 100 दिन का रोजगार पा सके हैं।
- राकेश कुमार, डीसी मनरेगा
मनरेगा में ‘मुर्दों’ को काम, जिंदा मजदूर को तलाश
भाजपा नेता ने डीएम को शपथ पत्र देकर की शिकायत
बोले प्रधान, मृतकों ने नहीं परिवार ने किया काम, भूल से अंकित हो गया मजदूर का नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। मजदूरों को सौ दिन रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना भ्रष्टाचार के चंगुल में फंस गई है। इस योजना में मृतकों को काम देकर रुपये की बंदरबांट की जा रही है। वहीं, काम की तलाश में जिंदा मजदूर दर-दर भटक रहे हैं। इस तरह की शिकायतें भी बीडीओ से लेकर सीडीओ तक पहुंच रही हैं। जांच भी होती है, लेकिन नतीजा सिफर है।
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विकास खंड हैंसर बाजार की डेबरी ग्राम पंचायत में ‘मुर्दो’ के मनरेगा में काम करने की शिकायत अभी अधिकारियों के पास पहुंची ही थी कि दुघरा कला गांव के भाजपा नेता एवं जिला पंचायत सदस्य संतोष चौहान ने डीएम को शपथ पत्र देकर मनरेगा में मृतकों को काम देने और भुगतान लेने का आरोप लगाया है। संतोष चौहान का आरोप है कि दुघरा कला गांव निवासी सीताराम पुत्र चरित्र की मौत हुए 20 वर्ष से अधिक का समय गुजर गया, लेकिन वर्ष 2020-21 में मनरेगा में उनके नाम पर काम दिखाकर 1809 रुपये की निकासी की गई है। रामअशीष पुत्र रामनयन, जिनकी मौत हुए दस वर्ष बीत गए, उनके नाम पर भी मनरेगा में काम दिखाकर वर्ष 2017, 2018, 2019 और 2020 में भुगतान कराया गया है। भाजपा नेता ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र देकर जांच कराने की मांग की है। जिस पर डीएम ने जल्द जांच कराने का आश्वासन दिया है। दूसरी तरफ प्रधान के पति फूलचंद का कहना है कि मृतक सीताराम और रामअशीष के जॉबकार्ड पर उनके परिवार के लोग काम किए हैं। भूल के कारण मृतकों का नाम दर्ज हो गया है। बीडीओ ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि इस तरह का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। मामला संज्ञान में आने पर जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
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