वित्तीय वर्ष बीतने के बाद भी अपलोड नहीं हुआ डॉटा
प्रिया साफ्ट और एम एक्शन साफ्ट पर अपलोड करना है डॉटा
बजट, कार्ययोजना, मजदूरों की वर्क आईडी आदि का देना होता है विवरण
डीपीआरओ ने सभी एडीओ पंचायतों को भेजा निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। ग्राम पंचायतों का पूरा हिसाब अब ऑनलाइन है। कार्ययोजना की स्वीकृति से लेकर बजट खर्च होने और मजदूरों का विवरण भी वेबसाइट पर अपलोड करना है। परंतु इस कार्य में जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतें पीछे हैं। डीपीआरओ ने सभी एडीओ पंचायतों को पत्र भेजकर डॉटा अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
जिले के नौ ब्लॉकों में 794 ग्राम पंचायतें हैं। इनकी वित्तीय कार्ययोजना, मिले बजट, खर्च हुए बजट, प्रस्तावित कार्ययोजना, पूर्ण कराए गए कार्य आदि का संपूर्ण विवरण प्रिया साफ्ट और एम एक्शन साफ्टवेयर पर अपलोड किया जाना है। इसके लिए कई बार निर्देश के बावजूद अभी भी अधिकांश ग्राम पंचायतों ने अपना डॉटा अपलोड नहीं किया है। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि बघौली ब्लॉक में 91 ग्राम पंचायतों में से 33 ग्राम पंचायतों ने ही वर्ष 2019-20 का कार्ययोजना अपलोड की है। इस वर्ष 1239 कार्य कराए गए हैं लेकिन इनमें से केवल 542 की ही जियो टैगिंग (पूर्ण कराए गए कार्य का फोटो अपलोड करना) हुई है। बेलहर कलां में 68 में एक भी ग्राम पंचायत का वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए कार्ययोजना अपलोड नहीं है। यहां 21 ग्राम पंचायतें ऐसी भी हैं जिन्होंने प्रिया साफ्ट पर अभी तक अपना डॉटा अपलोड नहीं किया है। जो 73 कार्य पूर्ण हो गए हैं उनमें से केवल सात कार्यों की ही जियो टैगिंग कराई गई है। हैंसर बाजार में भी 86 ग्राम पंचायतों में से किसी की नए वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना वेबसाइट पर अपलोड नहीं है। 26 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनके यहां प्रिया साफ्ट पर डॉटा अपलोड नहीं है। यहां 203 कराए गए हैं जिनमें से केवल एक कार्य की जियो टैगिंग हुई है। खलीलाबाद ब्लॉक में भी 109 में से 14 ग्राम पंचायतों ने नए वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना अपलोड नहीं की है। यहां भी 15 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिन्होंने प्रिया साफ्ट पर डॉटा अपलोड नहीं किया है।
डाटा अपलोड न होने पर रुक सकता है बजट
डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए ही प्रिया साफ्ट और एम एक्शन साफ्ट पर डॉटा अपलोड हो रहा है। कराए जा रहे कार्यों की जियो टैगिंग भी होनी है। परंतु ग्राम पंचायतें इसमें रुचि नहीं ले रहीं हैं। इसका असर अब ग्राम पंचायतों को नए वित्तीय वर्ष में मिलने पर बजट पर पड़ेगा। डॉटा अपडेट नहीं करने वाली ग्राम पंचायतों का बजट रुक सकता है।