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बाढ़ से ज्यादा उपेक्ष्ाा का दंश्ा

Sun, 02 Sep 2018 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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मुराली का पुरवा में घाघरा कर रही तेजी से कटान।
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हैंसर। घाघरा नदी की बाढ़ से प्रभावित करीब 20 गांव के लोग एक महीने से दुश्वारियां झोल रहे हैं। उफनाती नदी ने खेतों को काट लिया और अब पांच गांवों में पानी भरा है। इसके अलावा 15 गांवों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। इसके बावजूद प्रशासन न तो इन्हें बाढ़ पीड़ित मान रहा है और न ही सत्ता पक्ष या विपक्ष के नेता इनकी खोज खबर ले रहे हैं।

 

घाघरा नदी जुलाई महीने के अंतिम सप्ताह से ही मांझा क्षेत्र के लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। पहले जलस्तर बढ़ने पर किनारे की सैकड़ों एकड़ खेती कट गई। इसके बाद अगस्त महीने में जलस्तर बढ़ने पर गुनवतिया, चकदहां, सियरकला, करनजोत आदि गांवों के नजदीक तक पानी पहुंच गया। अगस्त महीने के दूसरे पखवारे में नदी ने खतरे के निशान को छुआ तो गुनवतिया समेत चार गांवों के लोगों को एमबीडी बांध व रिंग बांध पर शरण लेनी पड़ी। इसके बावजूद बाढ़ पीड़ित परिवारों को अब तक कोई मदद नहीं दी गई।

 

बांध पर वक्त गुजार रही पानमती ने बताया कि करीब एक माह से बाढ़ के चलते रहना-खाना दुश्वार हो गया है। बारिश व धूप में खुले आकाश तले रहने के बावजूद प्रशासन ने कोई मदद नहीं की। परमेश्वर कहते हैं कि यहां के लोग हर साल आग और पानी से तबाह होते हैं। पिछले वर्षों तक जनता और सरकार के सहयोग से संकट का समय काट लेते थे। लेकिन इस साल कोई हाल पूछने तक नहीं आ रहा है।दीनानाथ, कैलाश, कवलेश्वर, प्रभुनाथ आदि का कहना है कि बाढ़ पीड़ित लोगों की दुर्दशा न तो अफसरों को दिखाई दे रही है और न ही नेताओं को। आने वाले चुनाव के दौरान उदासीन अफसरों व नेताओं को माकूल जवाब दिया जाएगा।

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नदी का जल स्तर स्थिर
हैंसर। घाघरा नदी का जल स्तर रविवार को 79.28 मीटर पर स्थिर रहा। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की समस्या बरकरार है। सियरकला, गुनवतिया, गायघाट व भौंवापार गांव के लोग आज भी बंधे पर शरण लिए हुए हैं। पानी कम जरुर हुआ है लेकिन रास्ता अभी आवागमन लायक नहीं है। बाढ़ पीड़ित रामजतन, शिवपाल, सुरेश, रामनयन, दयाराम आदि का कहना है कि बरसात के कारण परेशानी बढ़ गई है। इन लोगों का कहना है कि जलजमाव के चलते अब लोग बीमार पड़ने लगे हैं।

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