सेमरियांवा ब्लाक के आठ मदरसों में टीकाकरण का कार्य सुस्त
पूरी तरह से सुरक्षित है टीका, बीमारियों से बचाएगा : सीएचसी अधीक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
बाघनगर। मिजिल्स रूबेला टीकाकारण अभियान में सेमरियांवा ब्लाक पिछड़ रहा है। वजह यह कि यहां के आठ मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता को नोडल अध्यापक टीकाकरण के फायदे नहीं समझा पा रहे। जिससे टीकाकरण टीम अभी 60 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा कर पाई है। सीएचसी अधीक्षक ने समाज के अन्य जागरूक लोगों से आगे आने की अपील की है।
मिजिल्स रूबेला टीकाकरण अभियान 26 नवंबर से चल रहा है। इसमें नौ माह से 15 साल तक के सभी बच्चों को टीका लगाया जाना है। यह टीका बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाएगा। सरकार जो टीका निशुल्क लगवा रही है उसके लिए लोगों को प्राइवेट अस्पताल में ढाई हजार रुपये तक खर्च करना पड़ेगा। सेमरियांवा ब्लाक में लगभग 88 हजार बच्चों को टीके लगाए जाने हैं। सभी जगह कैंप में टीकाकरण कार्य चल रहा है। परंतु आठ मदरसे ऐसे हैं जहां के बहादुर बच्चों को अब तक पूरी तरह से टीके नहीं लग सके हैं। इन मदरसों पर जाने वाली स्वास्थ्य टीमों ने सीएचसी अधीक्षक को बताया है कि मदरसों के नोडल शिक्षक बच्चों को इसका फायदा नहीं समझा पा रहे हैं।
जागरूक शिक्षक जफीर अली करखी, मौलाना फुजैल अहमद नदवी, जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद अहमद आदि ने इन बहादुर बच्चों के माता-पिता से टीका लगवाने की अपील करते हुए कहा है कि उनके बच्चों को टीका लग चुका है। जिन बच्चों को यह टीका नहीं लग पाएगा उन्हें बीमारी का खतरा अधिक रहेगा। सेमरियांवा के सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर जगदीश पटेल ने बताया कि यह टीका पूरी तरह से सुरक्षित है और बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाता है। हर जगह लोग आगे आकर बच्चों को टीके लगवा रहे हैं।