वर्ष-1937 में शुरू हुआ था कबीर निर्वाण मेला, अब मगहर महोत्सव
राईस जग्गूलाल श्रीवास्तव ने शुरू कराया था आयोजन
1987 में इसे कबीर महोत्सव और बाद में मगहर महोत्सव नाम दिया गया
50 वर्ष तक लोगों के सहयोग से आयोजित होता रहा मेला, जुटती रही भीड़
उदयभान त्रिपाठी
संतकबीरनगर। संत कबीर की निर्वाण स्थली पर बयासी वर्ष पहले मेला का आयोजन किया गया था। तब यहां के रईस जग्गूलाल श्रीवास्तव के प्रयास पर कबीर निर्वाण मेला लगा था। तब से अब तक केवल दो बार ही आयोजन नहीं हो पाया है। वर्ष-1987 से इसका आयोजन प्रदेश सरकार करा रही है और मेला भी अब महोत्सव हो चुका है।
कबीरचौरा मठ के महंत विचार दास बताते हैं कि शुरू में इस आयोजन में लोग अपनी जरूरत के सामान खरीदने आते थे। इस दौरान संत कबीर के विचारों पर आधारित गोष्ठी व भजन आदि के कार्यक्रम होते थे। वर्ष-1987 में स्थानीय युवाओं ने एक क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित की। इसमें खलीलाबाद के तत्कालीन एसडीएम आरसीपी सिंह को बतौर मुख्य अतिथि बुलाया गया था। कार्यक्रम पर चर्चा के बाद उनके प्रयास से कबीर निर्वाण मेला की जगह कबीर महोत्सव का आयोजन किया गया। कबीर महोत्सव के पहले आयोजन में शामिल वेद प्रकाश चौबे, सत्यप्रकाश चौबे, त्रिलोकीनाथ वर्मा, सैय्यद शमीम, राजेंद्र प्रसाद, शरद चंद्र, विस्मिल्लाह, सूर्य महात्मा सिंह आदि के साथ उन लोगों ने कार्यक्रम के लिए कुर्सी लगाने से लगायत अन्य सभी व्यवस्थाएं संभाली थीं।
मगहर को ख्याति दिलाएगा महोत्सव
दो वर्ष बाद फिर से मगहर महोत्सव शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली नगर पंचायत चेयरमैन संगीता वर्मा व उनके प्रतिनिधि राजेश उर्फ गुड्डू वर्मा का कहना है कि मगहर महोत्सव संतकबीर की निर्वाण स्थली के साथ-साथ इस कस्बे की तरक्की के लिए भी जरूरी है। आयोजन की ख्याति जितनी दूर तक फैलेगी, उस अनुपात में पयर्टक भी बढ़ेंगे। इसी सोच के साथ आयोजन को भव्य बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।