बखिरा (संतकबीरनगर)। मंगल बाजार में पांच दिवसीय रामलीला की शुरुआत रविवार की रात में हुई। स्थानीय कलाकारों ने रामलीला के प्रथम दिन नारद मोह प्रसंग का मंचन किया। नारद मोह का प्रसंग देख उपस्थित लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।
मंचन की शुरूआत में नारदजी तपस्या कर रहे थे। इंद्र को अपनी कुर्सी का भय हो गया। कामदेव को भेजकर तपस्या भंग करने का प्रयास विफल होने पर कामदेव ने नारद से क्षमा मांग लिया। इस पर देवर्षि नारद को कामदेव को जीतने का घमंड हो गया। इसे बताने के लिए वे शिव जी के पास चले गए। शिवजी ने कहा कि यह बात श्री हरि (भगवान विष्णु) को मत बताना। किन्तु वह विष्णु भगवान को भी बताने चले गए। भगवान विष्णु समझ गए कि देवर्षि नारद को अहंकार हो गया है। उन्होंने नारद का घमंड दूर करने के लिए माया से निर्मित नगर में राजा की सुंदर कन्या विश्व मोहिनी के स्वयंवर का स्वांग रचाया।
मंचन के दूसरे दृष्य में स्वयंवर की जानकारी होते ही देवर्षि नारद ने सोचा कि कुछ ऐसा उपाय करना चाहिए कि यह कन्या मुझसे ही विवाह करे। ऐसा सोचकर नारद जी ने भगवान विष्णु को याद किया। नारद जी ने विष्णु भगवान को सारी बात बताई और उनसे सुंदर रूप मांगा। विष्णु जी ने अपनी माया से नारद जी को बंदर का रूप दे दिया। बंदर रूप में नारद जी स्वयंवर में पहुंच गए। स्वयं भगवान विष्णु भी वहां एक राजा का रूप धारण कर आ गए। विश्व मोहिनी ने कुरूप नारद की तरफ देखा भी नहीं और राजा रूपी विष्णु के गले में वरमाला डाल दी। इससे नाराज होकर नारद ने भगवान विष्णु को भला बुरा कहते हुए श्राप दे दिया, किन्तु माया का आवरण हटते ही नारद जी भगवान से क्षमा मांगने लगे।ल प्रथम रात्रि का मंचन इसी के साथ समाप्त हो गया।
इस अवसर पर रामलीला समिति के मनीष कसेरा, राजू कसेरा, बलराम सिंह, अंजनी कसेरा, बिजय कुमार, दीपू, माता प्रसाद मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसओ सदानन्द सिंह, राममिलन यादव आदि मौजूद रहे।