संतकबीरनगर/मेंहदावल। तहसील क्षेत्र में राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया है। इस कारण क्षेत्र के लोगों की नींद उड़ गई है। तटबंध पर कई स्थानों पर पानी का दबाव बना हुआ है। बांध की सुरक्षा को लेकर ड्रेनेज खंड भी सतर्क हो गया है।
रविवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर 77.60 मीटर मापा गया था। सोमवार को जलस्तर 10 सेमी बढ़ गया। ड्रेनेज खंड के अफसरों के अनुसार पहाड़ी व मैदानी क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश से नदियों के जलस्तर में वृद्धि हो रही है। बढ़ते जलस्तर के कारण नौगो, जोरवा, विशुनपुर और बेलौली आदि जगहों पर नदी तटबंध से सटकर बह रही है। तटबंध की सुरक्षा के लिए ड्रेनेज खंड ने बचाव कार्य शुरू करा दिया है। नदी जुलाई माह से ही लगातार घट-बढ़ रही है। अवर अभियंता वीरेंद्र यादव का जलस्तर में उतार चढ़ाव से कोई खास दिक्कत फिलहाल नहीं है। तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखी जा रही है। इस संबंध में सीडीओ हाकिम सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार निगरानी की जा रही है। बंधे पर शरण लिए लोगों के स्वास्थ्य टीम भेजी गई थी। इसके साथ ही तहसील के अधिकारी और ड्रेनेज खंड के अधिकारी भी बंधे की निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल बांध पूरी तरह से सुरक्षित है।
तीसरी बार लाल निशान से ऊपर पहुंची घाघरा
हैंसर। घाघरा नदी सोमवार को फिर खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर चली गई। बीते 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 12 सेंटीमीटर वृद्धि हुई है। बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा बारिश के चलते और बढ़ गई है। सोमवार को घाघरा नदी तुर्कवलिया नायक में खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। इसके चलते एमबीडी बांध और घाघरा नदी के बीच गायघाट, चकदहा, ढोलबजा, गुनवतिया, सियरकला, सियाराम अधीन सिंह, भौंवापार, दौलतपुर, सुअरहा, सरैया, खरैया, धमचिया, आगापुर गुलरिहा, खालेपुरवा आदि गांव 15 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। सियरकला, गुनवतिया, गायघाट, चकदहा, भौंवापार आदि के लोग घर छोड़कर एमबीडी बांध और रिंग बांध पर शरण लिए हुए हैं। 15 दिन के भीतर तीसरी बार घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंची है। इधर हो रही मुसलाधार बारिश के कारण बंधे पर बसे लोगों को प्लास्टिक के नीचे रहना पड़ रहा है। प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए अभी तक कोई इंतजाम नहीं किया है। बाढ़ पीड़ित रामफेर, रामशंकर, ठाकुरदीन, बलंवत, रामराज, पार्वती, सुमित्रा, बाबूलाल, जयशंकर, प्रेमचंद्र और रामकलेश आदि का कहना है कि कई लोग बुखार, पेट दर्द, उल्टी, दस्त आदि बीमारियों की चपेट में हैं।