सांथा ब्लॉक में हुए मनरेगा घोटाले की जांच अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। अब सीबीआई चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई टीम के एक सदस्य ने गुरुवार को विकास भवन पहुंच कर कार्रवाई की जद में आए तीन ग्राम पंचायत अधिकारी और दो ग्राम विकास अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की सूचना बंद लिफाफे में डीडीओ और डीपीआरओ कार्यालय में रिसीव कराई है।
सूत्रों के अनुसार जांच में 15 से अधिक लोगों को दोषी पाया गया है। बस्ती मंडल के पूर्व कमिश्नर एवं मनरेगा के स्टेट लेबल मॉनीटर विनोद शंकर चौबे ने शासन के निर्देश के बाद सांथा ब्लॉक में मनरेगा घोटाले की जांच की थी। उनकी जांच में घोटाले की बात सामने आई थी। उसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के कुछ जिलों में मनरेगा घोटाले की सीबीआई जांच शुरू हुई तो संतकबीनगर भी उसमें शामिल था।
देहरादून की सीबीआई टीम ने सबसे पहले सांथा ब्लॉक में वर्ष 2007 से लेकर 2010 तक हुए मनरेगा के कार्यों की जांच शुरु की। जिसमें परत दर परत घपला खुलता चला गया। करीब दो साल से चल रही जांच अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सीबीआई के एक कांस्टेबल ने गुरुवार को जिले में पहुंचे और बंद लिफाफा डीडीओ और डीपीआरओ कार्यालय में रिसीव कराए। सूत्रों की माने तो सीबीआई ने तीन ग्राम पंचायत अधिकारी और दो ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ अभियोजन चलाने के साथ उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने के संबंध में डीडीओ और डीपीआरओ कार्यालय में समन्न तामिल करा दिया है।
सूत्र यह भी बताते है कि कुछ बीडीओ, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी समेत 15 से अधिक लोगों को जांच में दोषी पाया गया है। इसमें कुछ फर्मो के प्रोपराइटर व जनप्रतिनिधि और उनसे जुड़े परिवारों के लोग भी शामिल है। सूत्र यह भी बताए कि जो बीडीओ दोषी पाए गए है और वर्तमान में सेवा में है, उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास के कार्यालय में भी सीबीआई सम्मन तामिल करा चुकी है। जल्द ही सीबीआई टीम आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित भी कर सकती है। इससे घोटाले में संलिप्त लोगों में खलबली मच गई है।