अस्थाई पशु आश्रय केंद्र में भूख-प्यास से 12 पशु मरे
मेंहदावल क्षेत्र के बौधरा गांव में बनाया गया है केंद्र, अधिकारियों ने जेसीबी मंगाकर पशुओं के शव दफन कराए
चारा-पानी का नहीं कराया इंतजाम, भूख-प्यास से पशु हुए बेहाल
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अमर उजाला व्यूरो
मेंहदावल। बौधरा गांव में लावारिश और छुट्टा पशुओं को रखने के लिए बना अस्थाई पशु आश्रय केंद्र ही पशुओं के लिए जानलेवा हो गया। चारा-पानी का अकाल और चारों तरफ खोदी गई गहरी खाई को लांघ न पाने के चलते यहां एक-एक कर 12 पशुओं की मौत हो गई। कई और पशु गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। बुधवार को प्रशासन ने मरे पशुओं को दफनाने के लिए एक ठेकेदार से जेसीबी की मांग की तब यह मामला चर्चा में आया। एसडीएम ने पूरे प्रकरण से डीएम को अवगत कराया है।
मेंहदावल क्षेत्र में छुट्टा पशुओं से परेशान किसानों को राहत देने के लिए अस्थाई तौर पर बौधरा ताल के पास पशु आश्रय केंद्र बनाया गया है। छुट्टा पशुओं को यहां रखने के लिए चारों तरफ से गहरी खाई खोद दी गई है, लेकिन प्रशासन करीब 200 पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा व पानी का इंतजाम नहीं कर पाया। एक बार पशुओं को यहां कैद करने के बाद अधिकारियों ने बेजुबानों की तरफ देखा भी नहीं। बुधवार को घूरापाली गांव निवासी और ठेकेदार बृजेश यादव से बीडीओ ने जेसीबी मांगी तब इसकी चर्चा शुरू हुई। बृजेश के अनुसार जहां पशुओं को घेरकर रखा गया है वहां करीब 12 पशुओं के शव इधर-उधर पड़े थे। कई पशुओं के शव तो खाई में ही पड़े थे।
चर्चा फैलते ही बीडीओ ज्ञानेंद्र सिंह और एडीओ पंचायत मैनुदद्दीन सिद्दीकी अन्य कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे। जानकारी होते ही एसडीएम प्रेमप्रकाश अजोर भी वहां पहुंचे और मौके की स्थिति को देखते हुए विकास विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हिदायत दी। एसडीएम ने बताया कि पूरे प्रकरण से डीएम को अवगत कराया गया है। पशुओं की मौत कैसे हुई इसकी जांच कराई जाएगी, जो भी दोषी होगा उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
रुपये मिले 30 लाख, मांग रहे फ्री में सहयोग
मेंहदावल। बौधरा ताल में बनाए गए अस्थाई पशु आश्रय केंद्र के लिए करीब 30 लाख रुपये मिले हैं, लेकिन रकम पशुओं पर खर्च करने की बजाय जिम्मेदारी दूसरे पर थोपने की कोशिश ने बेजुबानों को मौत के मुंह में धकेल दिया। ब्लॉक के सूत्रों की मानें तो इस पशु आश्रय केंद्र में रखे गए पशुओं की देखभाल का जिम्मा हरपुर ग्राम सभा के प्रधान को सौंप दिया गया। अगल-बगल की कई और ग्राम पंचायतों के प्रधानों से भी मदद ली गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खुले आकाश तले चारा पानी के अभाव पशु बीमार पड़ गए। कुछ पशुओं की मौत कई दिन पहले की प्रतीत हो रही थी, क्योंकि शवों से उठती दुर्गंध से आसपास का वातावरण दूषित हो गया है।