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पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में तत्कालीन एसओ को पांच वर्ष की सजा

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पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में तत्कालीन एसओ को पांच वर्ष की सजा
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एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति का भी दिया आदेश
सह आरोपी तीन सिपाहियों को आरोप मुक्त कर दिया गया
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। पुलिस अभिरक्षा में 32 वर्ष पहले हुई एक मौत के मामले में एफटीलसी द्वितीय संदीप जैन ने तत्कालीन एसओ को नियमों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में एसओ के साथ सह आरोपी बनाए गए तीन सिपाहियों को आरोप मुक्त कर दिया गया है। आरोपी तत्कालीन थानाध्यक्ष सजा सुनते ही कटघरे में सिर पकड़कर बैठ गए। बाद में उन्हें जिला कारागार बस्ती भेज दिया गया।
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय को बताया कि 19 मार्च-1987 को बस्ती जिले के ओडवारा गांव निवासी जवाहर लाल को तत्कालीन थानाध्यक्ष मुंडेरवा परमानंद यादव किसी मामले में पूछताछ के लिए थाने ले गए थे। जवाहर लाल के भाई हीरालाल ने उसी दिन एसपी बस्ती को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि एसओ मुंडेरवा बिना किसी कसूर के उसके भाई को पुलिस अभिरक्षा में रखे हैं। अफसरों ने मामले का संज्ञान तो लिया लेकिन तीन दिन बाद 21 मार्च को पूछताछ के लिए जवाहरलाल को खलीलाबाद (संतकबीरनगर) डाकबंगले में बुलाया गया। 21 मार्च की शाम करीब साढ़े चार बजे खलीलाबाद डाकबंगले के सामने एक ट्रक की चपेट में आने से जवाहर लाल की मृत्यु हो गई।
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इस मामले में तत्कालीन एसओ मुंडेरवा परमांनद यादव और तीन सिपाहियों रमाशंकर, महावीर सिंह व लल्लन प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज कर जांच हुई। आरोप था कि इन लोगों ने बेवजह एक व्यक्ति को तीन दिन तक पुलिस अभिरक्षा में रखा और धन की लालच में गलत लिखा पढ़ी करके सरकारी कागज तैयार किया गया। जिस ट्रक की चपेट में आने से जवाहर लाल की मृत्यु हुई थी उसके चालक ने अपने बयान में कहा कि एक व्यक्ति डाकबंगले की तरफ से तेजी से भागता हुआ आया जिससे वह ट्रक की चपेट में आ गया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई थी। सुनवाई के दौरान तत्कालीन एसओ मुंडेरवा परमानंद यादव व आरोपी कांस्टेबल रमाशंकर, महावीर सिंह व लल्लन प्रसाद समेत कई गवाहों व दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं का भी बयान दर्ज कराया गया। कहा गया कि पुलिस अभिरक्षा में लेने के बाद बंदी को 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।
गवाही और साक्ष्यों के आधार पर एफटीसी द्वितीय संदीप जैन ने तत्कालीन एसओ परमानंद यादव को पांच वर्ष के सश्रम कारावास व एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश सुनाया। जुर्माना न अदा करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। क्षतिपूर्ति की राशि मृतक की विधवा को देने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा आरोपी सिपाही लल्लन प्रसाद, रमाशंकर तिवारी व महावीर प्रसाद को दोषमुक्त कर दिया गया।
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शांत हो गए तत्कालीन एसओ
न्यायालय में मौजूद तत्कालीन एसओ परमानंद यादव (निवासी ग्राम पंचायत जौही थाना हल्दी जिला बलिया) सजा सुनते ही शांत हो गए तथा कटघरे की फर्श पर बैठ गए। काफी देर तक किसी से कोई बात नहीं की। न्यायालय की कागजी कार्रवाई पूर्ण होने के बाद उन्हें जिला कारागार बस्ती भेज दिया गया। दरोगा को सजा सुनाए जाने का यह मामला कचहरी में चर्चा का विषय बना रहा।
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