अब तक मात्र 25747 क्विंटल हुई धान की खरीद
कसानों को ऑनलाइन क्रय केंद्र आवंटित है, फिर भी धान बेचने के लिए दौड़ लगा रहे
पहले सचिवों की हड़ताल और अब धान का उठान नहीं होने का बनाया जा रहा बहाना
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अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। रजनौली गांव निवासी राममिलन धान बेचने के लिए कई बार निर्धारित क्रय केंद्र जिगिना जा चुके हैं, लेकिन केंद्र प्रभारी कोई न कोई बहाना बनाकर वापस कर देते हैं। खाजो गांव निवासी राजन भी मुंडेरा शुक्ल स्थित क्रय केंद्र से लौटाए जा चुके हैं। आगापुर गुलरिहा निवासी उदयभान का धान क्रय केंद्र प्रभारी ने गुणवत्ता ठीक नहीं होना बताकर लौटा दिया। अब ये किसान अपना धान बिचौलियों के हाथ बेचने को मजबूर हैं।
ये चंद किसानों की पीड़ा तो बानगी भर है। जिले में तमाम ऐसे किसान हैं जो खरीद नहीं होने से परेशान हैं। किसी को धान बेचकर गेहूं की बुवाई करनी है तो किसी ने बच्चों के लिए जाड़े में गर्म कपड़े का बंदोबस्त करने की योजना बना रखी है। खरीद की धीमी रफ्तार ने सबके अरमानों पर पानी फेर दिया। जिले में इस बार 45 हजार मिट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य है, लेकिन खरीद की रफ्तार इतनी सुस्त है कि लक्ष्य के सापेक्ष अब तक मात्र 25747 क्विंटल धान की खरीद हुई है। एक नवंबर से शुरू हुई खरीद के लिए 39 केेंद्र खोले गए हैं। क्रय केंद्र प्रभारी पहले सचिवों की हड़ताल और बाद में मिलरों से अनुबंध नहीं होने के चलते धान नहीं खरीद रहे थे। अब भी कोई न कोई बहाना बनाया जा रहा है। डिप्टी आरएमओ रामानंद ने बताया कि धान खरीद में तेजी लाने के लिए सभी संस्थाओं को निर्देशित किया गया है। किसानों से अनुरोध है कि खरीद में किसी प्रकार की दिक्कत आने पर उनसे संपर्क करें। लक्ष्य के अनुरूप रजिस्टर्ड सभी किसानों से धान खरीद होनी है। मिलरों से अनुबंध हो गया है।
केंद्र आवंटन का उपाय भी काम नहीं आया
धान खरीद में गड़बड़ी रोकने के लिए शासन ने इस बार किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण कराने के साथ ही उन्हें खरीद क्रय भी आवंटित कर दिया है। किसानों को रजिस्ट्रेशन के साथ ही रसीद मिली है जिस पर संबंधित क्रय केंद्र का नाम, खेत का गाटा नंबर आदि दर्ज है। उम्मीद थी कि इससे फर्जी किसानों से धान खरीद की समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन पर्ची का यह सिस्टम किसानों के लिए मुसीबत बन गया। अब वे आवंटित क्रय केंद्र पर धान बेच नहीं पा रहे हैं और दूसरे क्रय केंद्र पर उनका धान खरीदा नहीं जा रहा।
मिलरों से अनुबंध नहीं होने से बढ़ी दिक्कत
किसानों से खरीदे गए धान को राइस मिलों पर कुटाई के लिए दिया जाता है। मिलर से मिला लेवी चावल एफसीआई गोदाम में जाता है, जिसे बाद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरण के लिए भेजा जाता है। एफसीआई ने लेवी चावल के कड़े मानक तय कर रखे हैं। मिलर भी लेवी चावल का प्रतिशत कम करने एवं कुटाई का रेट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।