हैंसर (संतकबीरनगर)। धनघटा तहसील के उप निबंधक कार्यालय के निर्माण के लिए दान में मिली पांच बिस्वा जमीन के खारिज दाखिल के साढ़े चार वर्ष पुराने आदेश को तहसीलदार ने वापस ले लिया है। अब जमीन का मालिकाना हक फिर से दानकर्ता को मिल गया है। तहसीलदार के इस फैसले पर आंदोलन कर रहे बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने खुशी जताई है। वहीं इस जमीन पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय के निर्माण के लिए पूर्व डीएम की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर ग्रहण लग गया है।
धनघटा तहसील का सब रजिस्ट्रार कार्यालय हैंसर मार्ग पर किराए के मकान में चलता है। वर्ष 2013 में धनघटा बाजार से सटे गागरगाड गांव निवासी सुभाष ने पांच बिस्वा जमीन उप निबंधक कार्यालय के निर्माण के लिए प्रशासन को दान दी थी। 28 मई 2013 को इस जमीन का खारिज दाखिल करते हुए खतौनी में राज्यपाल का नाम दर्ज हो गया। पूर्व डीएम ने इस जमीन पर ही सब रजिस्ट्रार कार्यालय के निर्माण के लिए शासन को 77 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा। हालांकि अभी इसके लिए बजट आवंटित नहीं हुआ है।
तहसील के अधिवक्ता बीते डेढ़ महीने से सब रजिस्ट्रार कार्यालय को तहसील परिसर में लाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। रविवार से अधिवक्ता कुमारी शांता श्रीवास्तव भूख हड़ताल पर भी बैठी हैं। अधिवक्ताओं ने सब रजिस्ट्रार दफ्तर के लिए दान में मिली जमीन के खारिज दाखिल पर भी आपत्ति की थी। इसकी सुनवाई करते हुए तहसीलदार धनघटा ने सोमवार को खारिज दाखिल के पूर्व के आदेश को वापस ले लिया। इसी के साथ जमीन का मालिकाना हक फिर से सुभाष के नाम से दर्ज हो गया।
सब रजिस्ट्रार दफ्तर का निर्माण सरकारी भूमि पर ही हो सकता है, लिहाजा पूर्व डीएम के प्रस्ताव पर भी संकट छा गया है। इस आदेश की जानकारी होने पर बार एसोेसिएशन ने खुशी जताई है। तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम मौर्य ने कहा कि तहसीलदार ने जनहित में सराहनीय फैसला किया है। अब रजिस्ट्री कार्यालय के लिए दान दी गई जमीन सरकारी नहीं रही। डीएम और एसडीएम को जनहित में तहसील परिसर में उप निबंधक कार्यालय लाने का कार्य कराना चाहिए।
इस संबंध में तहसीलदार वंदना पांडेय ने कहा कि राज्यपाल उत्तर प्रदेश सरकार बनाम सुभाषचंद्र के संबंध में पारित आदेश को वापस ले लिया गया है। दान की गई जमीन दानकर्ता के नाम हो गई है। दूसरी तरफ एसडीएम बाबूराम ने कहा कि तहसीलदार ने क्या आदेश किया है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। जानकारी हासिल करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।