संतकबीरनगर। खेतों में हरियाली और किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से वर्ष 1978 में शुरू सरयू नहर परियोजना 39 साल बाद भी अधूूूूरी है। शुरुआती दौर में इस परियोजना की लागत 78. 68 करोड़ थी, लेकिन समय से योजना पूरा नहीं होने से काफी बढ़ गई। वर्ष 2017 तक इस परियोजना पर 5185 करोड़ खर्च हो चुके है। वैसे दिसंबर 2019 तक परियोजना को पूर्ण किए जाने का शासन का निर्देश है। यदि परियोजना समय से पूरी हुई तो नौ जिलों के 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी।
घाघरा व राप्ती नदी में आने वाली बाढ़ को रोकने और लंबी नहरों का जाल बिछाकर खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए सरयू नहर परियोजना को अमल में लाया गया। इसके तहत बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर और महराजगंज तक 9205 किलोमीटर लंबी नहरें बनानी थी। इसके साथ ही डुमरियागंज, उतरौला, अयोध्या व गोला गोरखपुर में पंप नहर बनाने के साथ 3600 नलकूपों को भी स्थापित करने की योजना थी। साथ ही नौ हजार किलोमीटर ड्रेन बनाकर हर खेत तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया। 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस नहर के जरिए सिंचाई की जानी है, लेकिन यह परियोजना अब तक पूरा नहीं हो सकी। इससे किसानों के अरमानों पर जहां पानी फिर रहा है, वहीं ऐसे किसान जिनकी जमीन इस परियोजना की भेंट चढ़ गई, वह भी हताश और निराश हैै। इस परियोजना के लिए दस प्रतिशत प्रदेश सरकार को और नब्बे प्रतिशत धनराशि भारत सरकार को देना था। सरकारें आई और गई, लेकिन चौधरी चरण सिंह के इस सपने को साकार करने की फुर्सत किसी को नहीं मिली। वर्तमान में जिले की बात करें तो कई स्थानों पर नहरों का निर्माण कराया गया है। इसमें भुअरिया, सेमरियावां, बेलहर कला, मेंहदावल, खलीलाबाद आदि क्षेत्र शामिल हैै, लेकिन इन नहरों में पानी नहीं है। ऐसे में किसान सिंचाई के लिए भटकने को मजबूर होते हैं। किसान नंद किशोर साहनी ने कहा कि सरयूू नहर परियोजना पूर्ण न होने से उसमें पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में किसानों की जमीन अधिग्रहण कर नहर बनाने के औचित्य पर ही सवाल खड़ा हो रहा है। इसी प्रकार राजेंद्र चौधरी ने कहा कि जब नहरों में पानी की जरूरत रहती है तो उसमें पानी नहीं आता है, लेकिन जब जरूरत नहीं रहती तो पानी छोड़ देने से फसलें बर्बाद हो जाती है। फागू चौहान इस बात से नाराज हैं कि लंबे अर्से के बाद भी सरयू नहर में पानी नहीं है। आखिर कब तक इंतजार करें। गंगा प्रसाद यादव ने कहा कि परियोजना को जल्द से जल्द पूर्ण कराकर इसमें पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। डीएम भूपेंद्र एस चौधरी ने बताया कि नहर में जिन किसानों की जमीने अधिग्रहित की गई है,उनकी रजिस्ट्री कराने का कार्य विभाग के जरिए कराया गया है। दिसंबर 2019 तक परियोजना को पूर्ण किए जाने का निर्देश है। सरयू नहर के तीनों खंडों के एक्सईएन के साथ मीटिंग कर जानकारी जुटाएंगे। शासन की मंशा के अनुरुप कार्य होगा,जिससे किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सकें।