संभल। खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है। यह लाइन मशहूर शायर अल्लामा इकबाल ने कही थी। लेकिन इन लाइन को चरितार्थ संभल के गांव चिमियावली निवासी मंजू ने किया है। एक हादसे ने मंजू के दोनों हाथ छीन लिए तो उन्होंने पैरों को अपनी ताकत बना लिया। बेटी का यह जज्बा सोमवार की दोपहर शहर के एमजीएम कॉलेज में बीए दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा देने के दौरान देखने को मिला। यह जज्बा जिसने भी देखा वह हैरान हो गया।
संभल से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित छोटे से गांव चिमियावली की रहने वाली मंजू मुरादाबाद के गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से बीए कर रही हैं। दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं चल रही हैं। सोमवार को भूगोल विषय की परीक्षा देने के लिए वह एमजीएम कॉलेज पहुंची थीं। उन्होंने जमीन पर बैठकर अपने पैर से कलम पकड़कर पूरी परीक्षा निर्धारित समय में दी। मंजू ने बताया कि एक हादसे के दौरान कई वर्ष पहले दोनों हाथ गंवा दिए थे लेकिन पढ़ने की लगन थी तो पैरों को लिखने लायक बना लिया और अब हाथों की तरह ही वह पैरों से लिख पाती हैं। बताया कि उनका परिवार भी उनको पूरा सहयोग करता है। वह पढ़ लिखकर आगे बढ़ना चाहती हैं।