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संभल के ग्रामीण क्षेत्र में हर घर को पाइप लाइन से पानी देने के लिए सर्वेक्षण

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संभल जिले के ग्रामीण क्षेत्र में हर घर को पाइप लाइन से पानी देने के लिए सर्वेक्षण
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जल निगम के अभियंता करेंगे सर्वेक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
संभल। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने पेयजल आपूर्ति के लिए संभल समेत कई जनपदों को चुना है। इन जनपदों में पेयजल सुविधाओें को विकसित करने के साथ जल संरक्षण के लिए व्यापक काम होना है। संबंधित जनपदों में कैसे क्या काम होना है। इसकी कार्ययोजना केंद्र सरकार बना रही है। उम्मीद की जा रही है कि इसके लिए 15 अगस्त को प्रधानमंत्री घोषणा करेंगे। इस घोषणा से पहले संभल से उन सभी जनपदों से पेयजल सुविधाओं की मौजूदा स्थिति के बारे में रिपोर्ट मांगी गई है। जहां जल संरक्षण और पेयजल योजनाओं को शुरू करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम होना है। जल निगम द्वारा संभल जनपद की रिपोर्ट तैयार कराने के लिए सर्वेक्षण कराया जा रहा है।
बता दें कि अमर उजाला ने जनवरी 2017 से दिसंबर 2017 तक जहरीला हुआ जमीन का पानी-खतरे में जिंदगानी और पेयजल संकट से संबंधित खबरें श्रंखलाबद्ध तरीके से प्रकाशित की थीं। अमर उजाला की खबरों को पढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गौरव बंसल ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में याचिका दाखिल की थी। याचिका पर राज्य सरकार, जल निगम और जिलाधिकारी के साथ-साथ नगर निकायों से जवाब मांगा गया था। जवाब दाखिल करने के लिए जल निगम के अभियंताओं ने जिले में पेयजल की स्थिति का व्यापक सर्वे किया था। हैंडपंपों के पानी के नमूने लिए थे जिसमें खतरनाक स्तर तक पानी में आर्सेनिक की मात्रा मिली थी। इसी सर्वे के आधार पर एक रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी गई थी। जिसमें 32 गांवों के लिए पेयजल योजनाएं स्वीकृत करने का आग्रह था। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में भी राज्य सरकार ने जवाब दाखिल किया था जिसमें राज्य सरकार ने सभी गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का वायदा किया था। अमर उजाला की खबरों के बाद राज्य सरकार की जवाबदेही तय हुई और इसी का नतीजा है कि अब एक व्यापक काम पेयजल उपलब्ध कराने के लिए होने जा रहा है। जिसकी पहली कड़ी सर्वेक्षण है जो शुरू हो गया है। इसकी रिपोर्ट जुलाई में ही तैयार हो जाएगी।
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कोट-
जनपद में कुल कितने घर हैं। कितने घरों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध है। यह जानने के लिए सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। जल्दी ही सर्वेक्षण की रिपोर्ट आएगी।
राकेश कुमार उपमम, अधिशासी अभियंता जल निगम।
कोट-
मैं अमर उजाला अखबार में संभल जिले में पेयजल संकट के विषय में खबरें पढ़ रहा था। एक खबर मैंने पढ़ी जिसका शीर्षक था जहरीला हुआ जमीन का पानी खतरे में जिंदगानी इस खबर को पढ़कर मैंने एनजीटी में रिट करने का निर्णय लिया और अब मैं एनजीटी में संभल जिले की जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की लड़ाई लड़ रहा हूं। - गौरव बंसल, अधिवक्ता।
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वर्ष 2017 में यह थे हालात
संभल। संभल जिले के तीस से अधिक गांवों की जनता प्रदूषित पानी से पीड़ित है। कई गांवों में कैंसर से मौतों का सिलसिला जारी है। जल निगम ने संभल जिले के शहबाजपुरकला, सैंदरी तेलीपुरा, राया बुजुर्ग, बाघऊ, पाठकपुर समेत 11 गांवों के 250 सरकारी हैंडपंपों से पानी के नमूने लिए थे। छह गांवों की जांच में पानी सही पाया गया लेकिन शहबाजपुरकला, सैंदरी तेलीपुरा, रायाबुजुर्ग, बाघऊ और पाठकपुर का पानी मानकों पर खरा नहीं उतरा। शहबाजपुरकला में आर्सेनिक और नाइट्रेट की मात्रा अधिक थी। जल निगम से मिली जानकारी के मुताबिक आर्सेनिक की मात्रा एक लीटर पानी में 0.010 मिलीग्राम होनी चाहिए लेकिन शहबाजपुर कला गांव के सरकारी हैंडपंपों के पानी में यह मात्रा 0.016 मिलीग्राम तक पाई गई है। इसी तरह नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक होनी चाहिए यह मात्रा 45-75 मिलीग्राम तक पाई गई है। सैंदरी तेलीपुरा, बागऊ, पाठकपुर और रायाबुजुर्ग के पानी में भी नाइट्रेट और आर्सेनिक खतरनाक स्तर तक है। जिन गांवों का पानी मानकों पर खरा उतरा है, उसमें दहेरी जग्गू, मवई ढोल, रतूपुरा, सिंहपुर, नगला भूड़, चाटन शामिल हैं। यह खुलासा जल निगम की रिपोर्ट में हुआ है। इसके बाद प्रदूषित पानी वाले हैंडपंपों को प्रतिबंधित किया गया लेकिन नए हैंडपंप लगाने के लिए कोई काम नहीं हुआ। न ही पेयजल आपूर्ति के लिए किसी योजना पर काम हुआ।
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