शहर इमाम हाजी हाफिज हारुन के इंतकाल के बाद नायब शहर इमाम काजी मरगूब को शहर इमाम चुन लिया गया। इसके बाद दूसरे पक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। लंबी मशक्कत के बाद ईदगाह कमेटी के सदस्यों पर चुनाव के जरिए शहर इमाम के चयन की बात तय हुई। इसके बाद फिर एक बार मुश्किलें आ खड़ी हुईं।
शहर इमाम के चयन में ईदगाह कमेटी ने खुद को चुनाव प्रक्रिया से अलग कर कासिर बता दिया। शुक्रवार को एक पक्ष ने मौलाना नाजिम को शहर इमाम चुनकर खुशियां जाहिर की तो दूसरे पक्ष ने उप जिलाधिकारी से प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए ईदगाह की नमाज पढ़ाने के लिए हकदार बताते हुए नमाज पढ़ाने के लिए इंतजाम करने की मांग रखी।
ईद की नमाज नजदीक है। शहर का मुस्लिम समाज दो खेमों में बंटा हुआ है। शहर इमाम के फैसले पर अभी तक निर्णय साफ नहीं हो सका है। दोनों पक्षों अपने तर्कों से खुद को सही ठहरा रहे हैं।
फिलहाल एक पक्ष के लोगों ने मौलाना नाजिम को शहर इमाम चुनकर उनका बड़ी मस्जिद में स्वागत किया। इस मौके पर हाफिज अबरार हुसैन, मोहम्मद यामीन, हाजी मोहम्मद रफीक, हाजी बाबू हुसैन, हाजी मुशीरउद्दीन, सलीस, शाहिद हुसैन, चौधरी अख्तर हुसैन, आकिल खां, हाजी निजाम सैफी, वकील अहमद, हाजी कासिम अंसारी, डा.अली मोहम्मद, नजर मोहम्मद, तनवीर कुरैशी, मोहम्मद नईम, महमूद अख्तर, आवाद मियां, असलम, अशफाक हुसैन, मानिश बाबू मौजूद रहे। उधर काजी मरगूब के नेतृत्व में उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन में हवाला दिया गया है कि काजी साहिबान के नगर में 20-25 घर हैं। असुरक्षा का माहौल है। सुरक्षा की जाए। तीन सौ साल पुरानी इमामत को बचाया जाए। ईदगाह में काजी साहिबान में से किसी अन्य या पूर्व में नायब शहर इमाम काजी मरगूब से नमाज पढ़ाई जावे। सामंजस्य न होने पर किसी अन्य से जो सर्वमान्य हो उससे नमाज पढ़ाई जाए।