संभल। मुरादाबाद मार्ग स्थित बिजलीघर के पास तालाब की बेशकीमती भूमि को बुधवार को भाजपा नेता कपिल सिंघल और सपा नेता आरिफ व हिलाल कब्जामुक्त करा दिया। तहसीलदार धीरेंद्र सिंह के नेतृत्व राजस्व विभाग की टीम ने नापजोख की और चिह्नित जमीन पर सीमांकन कराया।
बुधवार की दोपहर करीब 12 बजे तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह, नायब तहसीलदार बबलू कुमार टीम के साथ पहुंचे। राजस्व निरीक्षक पंकज गुप्ता के नेतृत्व में लेखपालों की टीम ने भूमि की नापजाेख शुरू की। मौके पर 2590 वर्ग मीटर यानी करीब चार बीघा भूमि की नापजोख की गई। जेसीबी मौके पर बुलाकर खोदाई कराई और सीमांकन करा दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान कई लोग मौके पर पहुंचे और निजी भूमि होने का दावा किया है।
तहसीलदार ने बताया कि चार बीघा जमीन रिकार्ड में तालाब के नाम दर्ज है। यह जमीन शहर के मध्य में स्थित है और करोड़ों रुपये की संपत्ति है। इसके बगल के खातेदारों ने अपनी भूमि का एडजेस्टमेंट करने के लिए तालाब की भूमि पर कब्जा कर रखा है। बताया कि कि जो लोग अपनी निजी भूमि होने का दावा कर रहे हैं, उन्हें दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा है। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में जितनी भूमि तालाब के रूप में दर्ज है उसको मुक्त कराया गया है।
दावा-खरीदी थी भूमि, अब भी चल रहा मुकदमा
संभल। भूमि को कब्जामुक्त कराए जाने के दौरान मौके पर पहुंचे मोहम्मद अरकान ने कहा कि उन्होंने यह भूमि खरीदी थी, जिसके बाद मुकदमा भी चला था। वर्ष 1960 में किसी वजह से तालाब लिख दिया गया था। 1970 में एसडीएम कोर्ट और फिर कमिश्नरी से मेरे पक्ष में फैसला हुआ था। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू से संक्रमणीय भूमिधर हमें दर्ज किया गया था। मामला इलाहाबाद पहुंचा तो वापस कर दिया गया। एक पूर्व अधिकारी ने तालाब घोषित कर दिया था। इसका मुकदमा कमिश्नरी में चल रहा है, इसी हिसाब से अब जमीन को देखा जाए। संवाद
गाटा संख्या 304 से नहीं है कोई वास्ता
भाजपा नेता कपिल सिंघल के बेटे सार्थक सिंघल का कहना है कि तहसीलदार द्वारा जो बात कही गई वह निराधार है। तालाब की भूमि का गाटा संख्या 304 है। हमने वर्ष 2018 में जिस भूमि का बैनामा कराया था, उसका गाटा संख्या 303 है। पैमाइश गाटा संख्या 304 में की गई है। तालाब की भूमि और गाटा संख्या 304 से हमारा कोई वास्ता नहीं है।
सपा नेता बोले-मौके पर उनकी है सवा बीघा भूमि
सपा नेता अख्तर इसराईली ने कहा कि मौके पर सवा बीघा भूमि उनकी है, जो पुश्तैनी है। इस मामले को लेकर प्रशासन के सामने दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। हमारी निजी भूमि को सरकारी तालाब की भूमि कैसे बताया जा सकता है।