रात करीब 11 बजे धनारी रेलवे स्टेशन पर पहुंचने किसी ने उसे बता दिया कि एक भाई की मौत हो चुकी है। जबकि दूसरा अस्पताल में भर्ती है। जिसके बाद वह घर नहीं पहुंचा और अपनी हथेली पर सभी को राम-राम लिखकर फंदा लगाकर जान दे दी। थाना क्षेत्र के गांव औरंगाबाद निवासी विजय सिंह के मुनीश, ब्रजेश और पान सिंह तीन बेटे थे।
मुनीस चंडीगढ़ में ठेला लगाकर मूंगफली बेचता था। जबकि ब्रजेश और पान सिंह गांव में रहकर खेती और मजदूरी करते थे। तीनों की शादी हो चुकी थी, लेकिन फिर भी तीनों भाई एक-दूसरे से हद से ज्यादा प्रेम करते थे। बृहस्पतिवार की शाम पिता से विवाद के बाद पान सिंह ने फंदा लगाकर जान दे दी।
परिजन शव लेकर पहुंचे तो ब्रजेश भाई का शव देखकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। परिजन कुछ समझ पाते, तब तक उसने भी फंदा लगाकर जान देने का प्रयास किया, लेकिन परिजन और ग्रामीणों ने कमरे का गेट तोड़कर उसे बचा लिया। परिजनों ने चंडीगढ़ में रहने वाले मुनीश को घर बुलाने के लिए भाई की मौत की खबर छिपाते हुए ये कहा कि उसके दोनों भाई बीमार है।
जितना जल्दी हो सके घर आ जाओ। मुनीश रात करीब 11 बजे धनारी रेलवे स्टेशन पहुंचा तो किसी ग्रामीण ने उसे बता दिया कि उसके सबसे छोटे भाई पान सिंह की मौत हो चुकी है और उसका अंतिम संस्कार भी हो गया। जबकि दूसरे नंबर का ब्रजेश अस्पताल में भर्ती है। इसके बाद मुनीश ने धनारी रेलवे स्टेशन के पास से ही अपने तहेरे भाई अवधेश के पास फोन किया और बोला-उसके एक भाई की मौत हो गई, जबकि दूसरा मौत से लड़ रहा है।
ऐसे में मैं अब जीकर क्या करुंगा और रोते हुए फोन काट दिया। परिजन उसे तलाश करते हुए धनारी रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे तो रात दो बजे मुनीश का शव छोइया नदी के पुल के नीचे फंदे पर लटका मिला। आत्महत्या करने से पहले उसने अपनी हथेली पर लिखा था कि हम दोनों भाइयों की आत्मा...उसके आगे लिखा था, सभी को राम-राम।