संभल। जिले की आबादी बढ़ने के साथ ही हृदय रोगियों की भी संख्या में इजाफा हुआ है, लेकिन जिला अस्पताल में हृदय रोग विभाग को एक डॉक्टर तक नहीं मिल सका है। हालांकि अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का एक पद स्वीकृत है, जो पिछले करीब 10 साल से खाली पड़ा है। हृदय रोग विशेषज्ञ के न होने से हृदय रोगी मुरादाबाद, मेरठ या निजी चिकित्सकों के पास जाने को मजबूर हैं। वहीं, समय पर इलाज न मिलने पर कई बार हार्ट अटैक से मरीज की जान तक चली जाती है।
संभल में वर्ष 2006-07 में 100 बेड के संयुक्त अस्पताल की स्थापना हुई थी। तभी चिकित्सकों के 23 पद स्वीकृत किए गए थे, लेकिन अभी तक यह पद भरे नहीं गए। 29 सितंबर 2011 में जनपद घोषित होने के बाद संभल के संयुक्त चिकित्सालय को ही जिला अस्पताल का दर्जा दे दिया गया। इस समय जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 17 पद रिक्त हैं। इसमें एक है कार्डियोलॉजिस्ट का पद यानि हृदय रोग विशेषज्ञ। अभी सर्दी का मौसम है तो बुजुर्गों के बीमार होने की ज्यादा आशंका रहती है, लेकिन जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ के न होने से उपचार नहीं मिलेगा, यह तो तय है। इसलिए हार्ट अटैक के रोगी जिला अस्पताल आने से बचें।
असंतुलित खान-पान ने बढ़ाई रोगियों की संख्या
चिकित्सकों का कहना है कि असंतुलित खान पान और जीवनशैली से 100 में से हर दसवां व्यक्ति किसी न किसी तरह के हृदय रोग से पीड़ित है। हृदय की बीमारी अब उम्र दराज लोगों की बीमारी नहीं रही, बल्कि युवा भी इसकी गिरफ्त में आने लगे हैं। हालांकि समय-समय पर जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनात करने की मांग उठती रही है, लेकिन आज तक इनका सपना पूरा नहीं हो सका।
जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। जिला अस्पताल में हार्ट अटैक पीड़ित को प्राथमिक उपचार मिले, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि किसी को प्राथमिक उपचार न मिलने पर जान न गवानी पड़े। शासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
सुभाषचंद्र शर्मा, शहरवासी
जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की अत्यंत जरूरत है। क्योंकि हार्टअटैक पड़ने पर पीड़ित मुरादाबाद, मेरठ या फिर अन्य जगह के लिए भागने के लिए मजबूर होते हैं। समय पर इलाज न मिलने से कई बार उनकी दिक्क्तें बढ़ जाती हैं। इस पर शासन और प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
जसवंत सिंह, शहरवासी
शासन को अवगत कराया, लेकिन नहीं हुआ समाधान
जिला अस्पताल की प्रभारी सीएमएस डॉ. रंजना सिंह का कहना है कि कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति शासन स्तर से होनी है। समस्या से शासन को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक निदान नहीं हुआ है।