फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मृतकों को जीवित दर्शाकर बीमा की रकम हड़पने का भंडाफोड़

विज्ञापन
विज्ञापन
चंदौसी/गुन्नौर। गुन्नौर में एक बड़ी जालसाजी का खुलासा हुआ है। यहां लोगों ने एक निजी बीमा कंपनी के अभिकर्ताओं से सांठगांठ करके अपने मृत परिजनों को जीवित दर्शाकर उनके नाम बीमा पालिसी कराने के बाद कुछ समय बाद उन्हें मृत दर्शा दिया और बीमा की परिपक्वता राशि को निकलवा कर बांट लिया। शक होने पर बीमा कंपनी ने जांच कराई तो सात ऐसे लाभार्थी पाए गए हैं। जिसमें एक ने आठ लाख की बीमा राशि को निकाल लिया लेकिन अन्य छह की धनराशि निकलने की प्रक्रिया चल रही थी। पुलिस ने बीमा कंपनी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर चार बीमा धारकों को गिरफ्तार कर लिया है। तीन अभी फरार हैं। इनके बीमा एजेंटों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
विज्ञापन

आदित्य बिरला सनलाइक इंश्योरेंश के प्रबंधक मनीष ओझा को शक हुआ कि गुन्नौर क्षेत्र के कुछ बीमा धारकों की मृत्यु की सूचना अभिकर्ताओं के माध्यम से दी गई। जिनकी बीमा पालिसी कुछ समय पहले ही की गई थी। इस पर मामले की जांच कराई गई तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। बीमा कंपनी प्रबंधक मनीष ओझा ने गुन्नौर कोतवाली प्रभारी प्रवीण सोलंकी को तहरीर दी तो पुलिस ने भी जांच की।
कोतवाल सोलंकी ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या मामला सही पाए जाने पर बबराला के मोहल्ला शिवपुरी निवासी दीपक गुप्ता पुत्र सुनील कुमार, गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के ही हरगोविंदपुर निवासी सत्यपाल पुत्र धर्मपाल, असमोली थाना क्षेत्र के देहरी जग्गू गांव निवासी कमलेश कुमार पुत्र कल्लू, हयात नगर थाना क्षेत्र के दतियावली निवासी मुन्नी देवी पत्नी स्वर्गीय विजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।
विज्ञापन

बताते हैं कि इन चारों के साथ-साथ कुल सात लोगों ने अपने परिजनों की मृत्यु हो जाने के बाद उन्हें जीवित दर्शाकर उनके नाम से बीमा पालिसी कराई। सभी सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
अपर पुलिस अधीक्षक आलोक जायसवाल ने बताया कि विवेचना के दौरान बीमा कंपनी के अभिकर्ताओं के नाम भी प्रकाश में लाकर नामजद किया जाएगा, जिन्होंने इन सात लाभार्थियों से सांठगांठ करके उनके मृतक परिजनों के बीमे किए हैं। सीओ अशोक कुमार ने बताया कि सात लाभार्थियों में से सिर्फ असमोली क्षेत्र के कमलेश कुमार ने ही बीमा पालिसी की रकम को निकाला है। जिसमें दो लाख रुपये कमलेश को मिले और छह लाख रुपये बीमा एजेंट ने लिए हैं। क्योंकि बीमा एजेंटों ने इसी शर्त पर मृतकों के परिजनों से बीमा करना तय किया था कि उन्हें सिर्फ एक या दो लाख रुपये देगा, शेष रकम वह (एजेंट) ले लेंगे। मृतकों के परिजनों ने एक व दो लाख रुपये के लालच में बीमा एजेंटों को सभी अभिलेख मुहैया कराए।
केस-1
गिरफ्तार लाभार्थी दीपक गुप्ता ने बताया कि उसके पिता सुनील कुमार के दाहिने अंग में फालिश था। उनकी मौत छह मार्च 2017 को हो गई थी। 29 मार्च 2017 को उसके पास बबराला का उमेश शर्मा आया। उसने मृत पिता का बीमा करवाने के लिए एक लाख रुपये दिलाने की बात कही। लालच में आकर 29 मार्च को ही एजेंट ने उसके पिता की पालिसी संख्या 007276930 कर दी। जन सेवा केंद्र ने उसने मृत्यु प्रमाण भी बनवा लिया। जिसमें समय के काफी बाद की मृत्यु की तिथि थी।
केस 2
गिरफ्तार आरोपी सत्यपाल ने बताया कि उसके पिता की मृत्यु तीन मई 2017 को सर्पदंश से हो गई थी। 27 जुलाई 2017 को रजपुरा थाने के पतेई नासिर निवासी योगेश व बबराला निवासी महिपाल आया और एक लाख रुपये का लालच देकर पिता का बीमा कराना तय कर लिया। 12 जुलाई 2017 को उसने अपनी माता ऊषा देवी का भी बीमा करा लिया। पालिसी संख्या 007345064 हो गई। मृत्यु प्रमाण पत्र जनसुविधा केंद्र से बनवा लिया। जिसमें बिना किसी जांच के ही लेखपाल आदि संस्तुति कर देते हैं।
केस 3
गिरफ्तार महिला आरोपी मुन्नी देवी ने बताया कि उसके पति की मौत ट्यूूमर के कारण जुलाई 2017 में हो गई थी। बबराला निवासी बीमा कंपनी का एजेंट विकास उसके पास आया और एक लाख रुपये का दिलाने की बात कहकर मृत पति की पालिसी कराने के लिए अभिलेखों पर हस्ताक्षर आदि कराए। 007243053 बीमा पालिसी हो गई। 24 अगस्त-2017 को ही जनसेवा केंद्रों से मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवा लिया।
केस-4
गिरफ्तार आरोपी कमलेश कुमार ने बताया कि उसके पिता 10 अप्रैल-2016 को सर्पदंश से हो गई थी। सितंबर-2016 में असमोली थाने के बेला गांव निवासी एजेंट जाबिर अली उसके पास आया और बोला कि अपने पिता का बीमा करा लो। उसने कहा कि उन्हें मरे तो पांच महीने हो गए अब बीमा कैसे हो सकता है। एजेंट ने कहा कि इससे उसे कोई मतलब नहीं, मैं जो कहूं करते रहो। दो लाख रुपये मिल जाएंगे। उसने 007111061 बीमा पालिसी करके अभिलेख लाकर उसे सौंप दिए। 10 अक्तूबर 2016 को उसने मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवाकर लाकर दे दिया।
हेराफेरी के खुलासे से मृत्यु प्रमाण पत्र की ऑन लाइन प्रक्रिया पर उठे सवाल
मृत लोगों को जीवित दर्शाकर बीमा पालिसी करने के इस खेल में राजस्व महकमा तो घेरे में है ही साथ ही जन सुविधा केंद्रों से बनने वाले प्रमाण पत्रों की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवालिया निशान लग गया है। गुन्नौर क्षेत्र में सात लोग, जो कई महीने पहले मर चुके हैं लेकिन इसके बावजूद उनकी बीमा पालिसी कर दी गई। लेकिन इसमें सबसे बड़ी भूमिका मृत्यु प्रमाण पत्रों की है।
सवाल यह है कि आखिरकार मृत्यु के कई महीनों के बाद की तिथि के मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिए गए। जबकि प्रक्रिया तो यह है कि मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए ऑन लाइन आवेदन करने के बाद यदि आवेदन नगरीय क्षेत्र का है तो वह आवेदन एसडीएम कार्यालय से नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत कार्यालय जाएगा। वहां संबंधित लिपिक को जांचकर अपनी रिपोर्ट लगाकर वापस करना होता है।
यदि आवेदन ग्राम पंचायत का है तो उसे संबंधित ग्राम पंचायत का सचिव सत्यापित करता है। तब कहीं ऑन लाइन मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होता है। लेकिन गुन्नौर में जालसाजी के इस खुलासे ने ग्राम पंचायत व स्थानीय निकायों में होने वाले फर्जीवाड़े का भी खुलासा कर दिया है। सभी बिना जांच पड़ताल किए ही सत्यापन रिपोर्ट लगा रहे है। नियमानुसार तो इन लोगों को भी आरोपी बनाया जाना चाहिए। क्योंकि यदि मृत्यु प्रमाण पत्र सही बना होता तो शायद यह हेराफेरी नहीं हो पाती।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें