संभल। बृहस्पतिवार को होलिका का पूजन किया जाएगा। पूजन का शुभ मुहूर्त शाम चार बजे से रात 8:40 तक रहेगा। वहीं होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 9 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। शुक्रवार को रंग खेला जाएगा।
आचार्य पंडित शोभित शास्त्री के अनुसार बृहस्पतिवार को होलिका का पूजन शुभ मुहूर्त शाम चार बजे से रात 8:40 तक रहेगा। वहीं होलिका का दहन का शुभ मुहूर्त रात 9 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। होलिका दहन से पहले उसकी पूजा करने का विधान है। इस दिन पूजा करने से जातक को हर तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलने के साथ शुभ फलों की प्राप्ति होती है। होलिका दहन के दिन सूर्योदय के समय सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद होलिका पूजन वाले स्थान पर जाएं। इसके बाद पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाएं। इसके बाद हाथों को धोकर पूजा प्रारंभ करें। सबसे पहले जल अर्पित करें। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, रंग, सात प्रकार के अनाज, गेहूं की बालियां, गन्ना, चना आदि एक-एक करके अर्पित कर दें, साथ ही भगवान नरसिंह की पूजा भी कर लें। पूजन के बाद कच्चा सूत से होलिका की 5 या 7 बार परिक्रमा करके बांध दें।