दूसरी ओर सरकारी विभाग बच्चों को खेल के लिए पर्याप्त संसाधन और माहौल भी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। हालात ये है कि ब्लाक स्तरीय प्रतियोगिता में बच्चे ऐसे मैदान पर बिना जूतों के दौड़ रहे हैं जहां गड्ढे और सूखी घास उगी हुई है। ऐसे में हम उम्मीद करते हैं कि गांव से मिल्खा सिंह और पीटी ऊषा जैसी प्रतिभाएं निकलें।
शनिवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में ब्लाक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें ब्लाक क्षेत्र की न्याय पंचायतों के परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की। खंड शिक्षा अधिकारी कोमल यादव समेत एबीआरसी शालिनी सक्सेना व अमरसिंह की देख-रेख में प्रतियोगिता का शुभारंभ किया गया। बीएसए कार्यालय परिसर के जिस मैदान में प्रतियोगिता हुई वह ऊंचा-नीचा व गड्ढों से भरा हुआ था।
घास उगी हुई है जो सूख रही है। इस कारण कई बच्चे दौड़ते समय भी मैदान में गिर पड़े। यह बात दीगर है कि दिखावे के लिए मैदान में चूने की रेखाएं जरूर बनाई गई थीं। चंद घंटों में ही ब्लाक स्तरीय प्रतियोगिता का समापन भी हो गया। इससे साफ होता है कि किस तरह से बेसिक शिक्षा के अधिकारी प्रतियोगिता के नाम पर औपचारिकता भर पूरी कर रहे हैं और बच्चों को खेलकूद में निपुण बनाने की सरकार की मंशा को करारा झटका लग रहा है।
बहजोई। पर्याप्त कोष के बावजूद बच्चों को पर्याप्त संसाधन मुहैया नहीं है। ब्लाक स्तरीय प्रतियोगिता में जिस गड्ढों भरे मैदान पर बच्चों को दौड़ाया गया वहां उनके पैर बचाने के लिए पीटी शूज भी उपलब्ध नहीं थे। कुछ बच्चे नंगे पैर दौड़े तो कुछ ने हवाई चप्पल पहनकर ही दौड़ लगा दी।
दौड़ की प्रतियोगिता के लिए उबड़-खाबड़ मैदान का चयन किया गया। बच्चों को दौड़ के लिए कोई तय ट्रैक नहीं दिया गया। दौड़ने के स्थान से घास नहीं हटाई गई। बच्चे सैंडल, हवाई चप्पल, नंगे पांव मैदान पर दौड़ते दिखाई दिए। जबकि, दौड़ की प्रतियोगिताएं बाकायदा रेसिंग ट्रैक बनाकर कराई जानी चाहिए जिस पर घास या कंकड-पत्थर न हो। दौड़ने के स्थान पर सूखी घास कई बार नंगे पैरों में चुभने से धावक चोटिल हो सकता है। रेसिंग ट्रैक पर को समतल कर उस पर मिट्टी डलवाई जानी चाहिए।