संभल का श्रीकल्कि मंदिर का भव्य नजारा।
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संभल में 68 तीर्थ हैं तथा 19 धर्म कूप स्थित हैं। नगर तीनों कोणों पर शिवालय हैं। श्री कल्कि नगरी के नाम से भी संभल को जाना जाता है। स्कंद पुराण में संभल की धरती पर श्री कल्कि के अवतार होने का प्रसंग है। जबकि एक जमाने में संभल पृथ्वीराज चौहान की राजधानी भी रहा है। स्थानीय लोग संभल के को धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग करते रहे हैं। यह मांग तीन दशक से भी ज्यादा पुरानी है।
वर्ष 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के कार्यकाल में उस समय के पर्यटन राज्यमंत्री लल्लू सिंह संभल आए थे। लल्लू सिंह ने संभल को धार्मिक पर्यटन की नगरी के तौर पर विकसित करने का भरोसा दिया था। इसके लिए तत्कालीन पर्यटनमंत्री कलराज मिश्र के समक्ष प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन धनाभाव में प्रस्ताव अटक गया।
इसके बाद जब भी संभल के चुनिंदा लोग लखनऊ गए उन्होंने संभल के धार्मिक और पौराणिक महत्व का उल्लेख करते हुए इस नगरी के तीर्थ स्थलों को विकसित करने की मांग की, लेकिन अफसोस इस बात का रहा है कि अब तक किसी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
योगी आदित्य नाथ के समक्ष जब यह मांग की गई तो वह इस पर सहमत हो गए। उन्होंने बहजोई में सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में संभल को धार्मिक पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करने की मांग पूरी कर दी है। अब इसके लिए शासन स्तर से जल्दी ही प्रक्रिया शुरू होने के आसार हैं।