बहजोई। दूसरे दिन भी पालिका के ठेकेदार व मेला ट्रस्ट के पदाधिकारी आमने-सामने आ गए और दोनों में जमकर नोकझोंक हुई। बाद में डिप्टी कलक्टर व प्रभारी ईओ आशुतोष तिवारी भी मौके पर पहुंच गए। बावजूद इसके पूरा मामला उस समय डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया तक जा पहुंचा, जबकि ठेकेदार मेला की जमीन पर अधूरे पड़े सत्संग भवन का निर्माण शुरू कराना शुरू कर दिया। डीएम ने एडीएम प्रदीप वर्मा व ईओ के साथ मेला की जमीन पर पहुंचकर मौका-मुआयना किया।
शुक्रवार को सुबह करीब सवा दस बजे नगर पालिका परिषद के ठेकेदार मां भगवंतपुरवाली देवी मंदिर मेला की जमीन निर्माण कार्य शुरू करने पहुंच गए। जानकारी होने पर मेला ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य शुरू करने का विरोध किया। इस बीच दोनों पक्षों में नोकझोंक शुरू हो गई। ईओ भी मौके पर पहुंच गए।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों की शिकायत पर डीएम मेला की जमीन पर पहुंचे। इस बीच डीएम ने देवी मंदिर परिसर का भी मुआयना किया। इसके बाद डीएम ने पालिका को मेला जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न कराए जाने के निर्देश दिए। इस बीच मौके पर आरआरएफ की टीम तैनात रही।
मेला पदाधिकारियों का कहना था कि ईओ ने मौके पर पहुंचकर ठेकेदारों ने मेला की जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने की बात कही। वहीं, किसी के विरोध करने पर कार्रवाई कराने को कहा। इस पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की ओर से पूरा मामला डीएम को बताया गया। इस पर डीएम ने मौके पर पहुंचकर मौका मुआयना किया और मेला की जमीन पर पालिका को किसी भी प्रकार का निर्माण न कराने को कहा।
पालिकाध्यक्ष समेत भाजपाई भी मौके पर पहुंचे
मंदिर मेला की जमीन पर डीएम के मौका मुआयना के दौरान पालिकाध्यक्ष राजेश शंकर राजू समेत भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमवीर सिंह खड़गवंशी, जिला महामंत्री कमल कुमार कमल व भाजपा नेता विकास वाष्र्णेय आदि भी मौके पर पहुंचे। इस बीच पालिकाध्यक्ष की ओर से कई बार डीएम से मेला की जमीन पर सत्संग भवन का निर्माण व इंटरलॉकिंग कार्य कराने जाने की पैरवी की गई, लेकिन डीएम ने मंदिर के मेला की जमीन पर पालिका की ओर से सत्संग भवन आदि का निर्माण कार्य न कराए जाने के निर्देश दिए गए।
यह है मंदिर के मेले की जमीन के विवाद से जुड़ा पूरा मामला
ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना था कि नगर पालिका परिषद को वंदन योजना के तहत मां भगवंतपुरवाली देवी मंदिर के सौंदर्यीकरण को धनराशि मिली है। पालिका की ओर से किए गए टेंडर में भी मंदिर पर सौंदर्यीकरण का कार्य कराने का जिक्र करते हुए टेंडर किया गया है। बावजूद इसके पालिका की ओर से मंदिर में सौंदर्यीकरण का कार्य न कराकर मंदिर के मेले की जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से पानी की टंकी का ओवरहेड टैंक व सत्संग भवन आदि का निर्माण कराना शुरू कर दिया था। इस पर पदाधिकारियों ने विरोध किया। पुलिस समेत प्रशासन व शासन तक शिकायत की गई थी। तब कहीं जाकर ओवरहेड टैंक का निर्माण कार्य रुका, लेकिन पालिका की ओर से जमीन पर सत्संग भवन का निर्माण लगातार कराया जाता रहा। अब इसकी शिकायत की गई है। कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाया।
नगर पालिका परिषद को निर्देशित किया गया है कि सौंदर्यीकरण के लिए आई धनराशि मंदिर में ही खर्च की जाए। यह धनराशि मंदिर के नाम से ही आई है। देवी मंदिर मेला की जमीन पर पालिका की ओर से इस धनराशि को खर्च नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।