अमरोहा। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह और सदर तहसीलदार परमानंद श्रीवास्तव के बीच बुधवार को कलक्ट्रेट परिसर में तीखी नोकझोंक हो गई। किसानों की समस्याओं को लेकर एसडीएम रीतू रानी से वार्ता के दौरान तहसीलदार के हस्तक्षेप पर सरदार वीएम सिंह नाराज हो गए। कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया, हालांकि एसडीएम के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया।
इससे पहले जोया स्थित एक होटल में आयोजित किसान पंचायत में सरदार वीएम सिंह ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार (फ्री ट्रेड) समझौते का विरोध करते हुए कहा कि यह किसानों, खेत मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और देश की खाद्य एवं आर्थिक संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
पंचायत के बाद राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और देश बचाओ मोर्चा के पदाधिकारी कलक्ट्रेट पहुंचे। किसानों की मांगें सुनने के लिए एसडीएम रीतू रानी मौके पर पहुंचीं। इसी दौरान तहसीलदार परमानंद श्रीवास्तव के बीच में बोलने पर सरदार वीएम सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा, एसडीएम से वार्ता चल रही है, आप बीच में क्यों बोल रहे हैं... आप कौन हैं... मुझे क्या समझाओगे। इस पर कुछ देर के लिए किसानों और प्रशासन के बीच माहौल गरमा गया।
स्थिति बिगड़ती देख एसडीएम रीतू रानी ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराया। इसके बाद किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन देने से इनकार करते हुए जिलाधिकारी से ही मिलने की बात कही। बाद में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) गरिमा सिंह मौके पर पहुंचीं। उन्होंने संगठन के प्रतिनिधियों की मांगों को विस्तार से सुना, जिसके बाद उन्हें ज्ञापन सौंपा गया और धरना समाप्त कर दिया।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड समझौते को तत्काल निरस्त करने की मांग की। सरदार वीएम सिंह ने कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर विचार नहीं किया तो देश बचाओ मोर्चा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। इस दौरान जिलाध्यक्ष जोरावर सिंह, प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह, जोगेंद्र सिंह, डालचंद मेव, अमित चौधरी, नरेंद्र सिंह, हरदीप सिंह प्रधान, योगेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह फौजी, खचेड़ू सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।