संभल। शहर में निजी बसों का संचालन तो जिलेभर के लिए होता है लेकिन इन बसों के लिए बस अड्डा नहीं है। यह बसें मुख्य मार्ग किनारे खड़ी कर दी जाती हैं। चलते हुए ही यात्रियों को सवार कर लिया जाता है। इसी तरह यात्रियों को उतारा जाता है। ऐसे में यात्रियों के साथ हादसाें का अंदेशा रहता है। इस पर न जिम्मेदार अधिकारियों ने ध्यान दिया है और न बस यूनियन ने ही कोई मांग उठाई है। जबकि इससे जाम और यातायात बाधित होने की स्थिति भी दिन में कई बार दिखाई पड़ती है।
संभल से चंदौसी, बहजोई, हसनपुर, मुरादाबाद और आदमपुर व गवां के लिए बसों का संचालन किया जाता है। इन सभी रूट पर 100 से ज्यादा बसों का संचालन हर दिन होता है। इन बसों को मुख्य मार्ग किनारे खड़ा कर दिया जाता है और यात्रियों को बैठाया जाता है। जब यात्री लौटते हैं तो सड़क किनारे ही उतारा जाता है। महिलाओं और बच्चाें के लिए यह सफर हादसों का अंदेशा पैदा करता है। क्योंकि यह बसें जहां भी खड़ी की जाती हैं वहां वाहनों का आवागमन ज्यादा रहता है।
चंदौसी और मुरादाबाद जाने वाली बसें तो चंदौसी चौराहे पर खड़ी कर दी जाती हैं। इन बसों की वजह से दिन में कई बार जाम के हालात बनते हैं। यात्री भी इन बसों के पीछे दौड़ते दिखते हैं। ऐसे में इन बसों को बस अड्डा मिल जाए तो यात्रियों के लिए खतरा नहीं रहेगा और जाम की भी स्थिति नहीं रहेगी।
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ट्रांसपोर्टनगर की उठती रही मांग लेकिन नहीं शुरू हुई कवायद, सड़क किनारे ही खड़े हो रहे ट्रक
संभल में ट्रांसपोर्ट का भी बड़ा काम है। इसके चलते सैकड़ों ट्रक का संचालन शहर से किया जाता है। इन ट्रक को खड़ा करने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर की मांग तो कई बार उठी लेकिन कवायद दम तोड़ गई। हालात यह हो गए हैं कि अब यह ट्रक मुख्य मार्ग किनारे ही खड़े रहते हैं। इससे हादसों का खतरा हर समय रहता है। कोहरे के दौरान यह खतरा बढ़ जाएगा। मुरादाबाद मार्ग पर बिजलीघर के आसपास तमाम ट्रक खड़े दिखाई देते हैं। इसी तरह चंदौसी रोड और दूसरे मुख्य मार्ग हैं जहां ट्रक खड़े किए जाते हैं। ट्रक स्वामियों की मजबूरी है लेकिन यह हादसों को दावत देना भी है। इसके लिए भी जिम्मेदार बेहतर कदम नहीं उठा पाए हैं।
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बसों के चालकों को बुलाकर वार्ता की जाएगी। बसें खड़ी करने के लिए कहीं उन्हें व्यवस्था करनी चाहिए। बस संचालक नगर पालिका से भी आग्रह कर सकते हैं या निजी भूमि में बस अड्डा बनाकर संचालन करें। जिससे हादसों का खतरा न हो।
-अमिताभ चतुर्वेदी, एआरटीओ, संभल