चंदौसी। बिहार निवासी व्यक्ति तीन साल से अपनी बेटी के पास फैजगंज बेहटा क्षेत्र के गांव गंगोली में रहा था। वापस बिहार जाते समय मझोला रेलवे स्टेशन पर बेहोशी की हालत में मिला था। सीएचसी चंदौसी में उसे मृत घोषित किया था। पुलिस ने पोस्टमार्टम भी कराया था। अब एक माह से मृतक की पत्नी व बेटी मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रही है। पंचायत सचिव व अस्पताल मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बना रहे हैं, दोनों एक दूसरे पर टाल रहे हैं।
बिहार प्रदेश के गांव उलार भरतपुर निवासी भीमसैन बीते तीन साल से फैजगंज बेहटा क्षेत्र के गांव गंगोली में अपनी बेटी पूनम पत्नी राकेश के घर रहते थे। परिजनों के अनुसार भीमसैन तीन सितंबर को अपने गांव उलार जाने के लिए घर से निकले थे। चार सितंबर को उनकी बेटी को जानकारी मिली, कि वह मझोला स्टेशन पर बेहोशी की हालत में मिले हैं।
उनको उपचार के लिए चंदौसी के अस्पताल में लाया गया है। जब तक परिजन अस्पताल पहुंचे, भीमसैन की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने पंचनामा की कार्रवाई कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद मृतक का गंगाेली गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया था। उसके बाद से परिवार वाले मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए कभी अस्पताल तो कभी ब्लॉक के चक्कर काट रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल वाले कहते हैं कि पंचायत सचिव मृत्यु प्रमाण बनाएंगे।
वहीं जब सचिव के पास जाओ तो वह कहते हैं कि जिस स्थान पर मौत हुई है, वहां ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनेगा। इतना ही नहीं जब वह ब्लॉक पहुंचा तो कहा गया कि जिस स्थान पर अंतिम संस्कार किया गया। उस गांव का सचिव ही प्रमाणपत्र बनाएगा। करीब एक माह का समय बीत चुका है। पीड़ित परिवार लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक चुका है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित परिवार मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस कार्रवाई की रिपोर्ट और शपथ पत्र हाथ में लेकर इधर उधर भटक रहा है।