पहाड़ों पर लगातार मूसलाधार बारिश के बाद उफान पर चल रही गंगा की सहयोगी नदियों का पानी अब मैदानी भागों में प्रवेश करने लगा है। शुक्रवार को हरिद्वार से गंगा नदी में अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है। इससे बिजनौर व नरौरा डैम पर पानी बढ़ गया।
गुन्नौर के जुनावई क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नरौरा में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से सवा मीटर नीचे है। प्रशासन से सतर्कता बढ़ा दी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी है।
उत्तराखंड में पिछले चार दिन से हो रही भारी बारिश से गंगा की सहयोगी नदियां गंगोत्री, अलकनंदा, मंदाकिनी उफान पर है। जगह-जगह लगे बांध पर अतिरिक्त पानी छोड़े जाने का दबाव बन गया है। गुरुवार को हरिद्वार में पानी का बहाव 43,941 क्यूसेक प्रति सेकेंड था जोकि शुक्रवार को 86,144 क्यूसेक प्रति सेकेंड हो गया।
जबकि बिजनौर में गुरुवार के अपेक्षा पानी का बहाव दोगुना हो गया शुक्रवार को यहां से 1,12,785 क्यूसेक प्रति सेकंड की दर से पानी छोड़ा गया। इसका दबाव नरौरा के चौधरी चरण सिंह गंगा बैराज पर पड़ रहा है। जहां शुक्रवार को 55,398 क्यूसेक प्रति सेकेंड से पानी छोड़ा गया।
अब जलस्तर 177.43 मीटर पर है। जहां 178.76 मीटर पर खतरे की घंटी बज जाती है। तार बाबू देवेश कुमार ने बताया कि नरौरा से ढाई लाख क्यूसेक प्रति सेकेंड पानी छोड़ने के बाद बाढ़ के हालात बन जाते है। अभी गंगा खतरे के निशान से काफी नीचे है। फिर भी बाढ़ आशंकित क्षेत्रों में अलर्ट भेजा गया है।
अगर पहाड़ों पर बारिश के आसार ऐसे ही बने रहे तो अगले एक दो दिन में गंगा नदी का पानी खतरे के निशान का पार करने की संभावना रहेगी। लिहाजा जुनावई क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांवों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।