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Sambhal News: तत्कालीन ईओ बोले- चेयरमैन के दबाव में वापस ली गई थी याचिका

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संभल। सौ करोड़ रुपये से ज्यादा के जमीन घोटाले में गिरफ्तार शाहजहांपुर के सहायक नगर आयुक्त और संभल के पूर्व अधिशासी अधिकारी (ईओ) राजकुमार गुप्ता रविवार को आठ घंटे पुलिस के घेरे में रहे। कोर्ट से रिमांड मंजूर होने के बाद पुलिस ने गहन पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक इस दौरान राजकुमार गुप्ता ने कहा कि तत्कालीन चेयरमैन (पालिकाध्यक्ष) कौसर अहमद के दबाव बनाकर कहने पर उन्होंने हाईकोर्ट से याचिका वापस ली थी। कौसर अहमद ने समझाया था कि प्रश्नगत जमीन पालिका की नहीं है, लिहाजा याचिका वापस ले लो।
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राजकुमार गुप्ता के इस बयान के बाद तत्कालीन पालिकाध्यक्ष कौसर अहमद पर भी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। हालांकि इस बीच पुलिस कौसर अहमद से दो बार पूछताछ कर चुकी है। साल 2013 में इस याचिका को वापस लिए जाने के बाद ही सौ करोड़ से ज्यादा मूल्य की 38 बीघा सरकारी जमीन को खुर्दबुर्द करने का रास्ता साफ हो गया था। हैरानी की बात यह है कि याचिका वापस लेने वाले राजकुमार गुप्ता ने इसे भी गंभीरता से नहीं लिया कि तख्तगोसाई में स्थित इस सरकारी जमीन को बचाने के लिए याचिका दाखिल करने वाले उनसे पूर्व के ईओ ही थे। संभल में ईओ के पद पर तैनात रहते ईओ वीके झा ने साल 2008 में याचिका दाखिल की थी।



तब नगर पालिका के हाईकोर्ट तक जाने का कारण तत्कालीन डीडीसी की कोर्ट का आदेश बना था। इस आदेश के तहत संभल में मियां सराय निवासी सईदुल रहमान को इस 38 बीघा जमीन का पट्टेदार मान लिया गया था, सईदुल रहमान द्वारा पेश किए जा रहे सन 67 के दस्तावेज को पालिका ने पट्टे का वैध कागज मानने से इन्कार कर दिया था। इसीलिए तत्कालीन पालिका की टीम डीडीसी के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट तक गई थी। बाद में ईओ के पद पर राजकुमार गुप्ता की तैनाती हो जाने पर साल 2013 में उन्होंने याचिका वापस ले ली थी।
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इस मामले के विवेचक सीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि ईओ को रविवार सुबह आठ बजे से पुलिस रिमांड पर लाया गया था। पूछताछ के बाद शाम सात बजे उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।



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पालिका की कई संपत्तियों को लेकर विवादित रहे राजकुमार गुप्ता

राजकुमार गुप्ता का संभल ईओ के पद पर कार्यकाल छह वर्ष का रहा था। संभल जिला घोषित होने के बाद 2011 में तैनाती हुई थी। वह 2017 तक पालिका में तैनात रहे। इन छह वर्षों में बसपा और सपा शासन रहा था। बसपा शासन में एक सपा नेता के करीबी के खिलाफ पालिका की जमीन पर कब्जा करने के आरोप में संभल कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन बाद में यह मामला दबा दिया गया था। इसमें भी उनकी सांठगांठ चर्चा में रही थी। इसके अलावा सरायतरीन के बाजार गंज इलाके में पालिका की करोड़ों रुपये की जमीन पर दुकानों का निर्माण कराके बड़े बंदरबांट का भी आरोप लगा था। इसकी शिकायत सरायतरीन के व्यापारियों ने डीएम अंकित खंडेलवाल से की है। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए पालिका के मौजूदा ईओ आदित्य प्रकाश को निर्देश दिए हैं। यह जमीन पालिका के रिकॉर्ड में दर्ज है लेकिन कब्जे दूसरे लोगों ने कर रखे हैं। यह निर्माण भी नाले के ऊपर किया गया है।



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पुराने वाहन खरीदकर पालिका के 84 लाख रुपये के गबन में भी आरोपी बने थे ईओ और पालिकाध्यक्ष



पालिका में वर्ष 2012 से 2017 तक पांच वाहन खरीदे गए थे। इनकी कीमत 84 लाख रुपये थी जो पालिका के खजाने से निकाले गए थे। पूर्व सभासद मुकेश शुक्ला ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जांच हुई और 84 लाख रुपये का गबन पकड़ा गया। इसमें पूर्व पालिकाध्यक्ष कौसर अहमद और ईओ राजकुमार गुप्ता पर 42-42 लाख रुपये गबन करने का आरोप तय हुआ। रकम जमा कराने के निर्देश भी दिए गए थे। तब राजकुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली और कौसर अहमद आठ लाख रुपये तहसील में जमा करने के बाद हाईकोर्ट पहुंच गए थे।



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सरकारी जमीन कब्जाने के मामले में जो याचिका हाईकोर्ट से वापस ली गई थी। उस पर पूछताछ में तत्कालीन ईओ ने बताया है कि पूर्व चेयरमैन ने याचिका वापस लेने के लिए कहा था। इसलिए याचिका वापस ली थी। इस बयान के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी, संभल
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