केंद्र सरकार के निर्देश पर सरकारी क्रय केंद्रों से कराई गई उड़द की खरीद में धांधली का आरोप लगते ही जांच भी शरू हो गई। शिकायत करने वाली एक सामाजिक संस्था के द्वारा दावा किया जा रहा है कि अगर निष्पक्ष जांच हो गई तो बिचौलियों की भूमिका उजागर होगी। यह भी साफ हो जाएगा कि किस तरह से सरकारी खजाने को चूना लगाया गया और किसानों को भी भरपूर कीमत न मिल सकी। ऐसा कहा जा रहा है कि उड़द की खरीद में बिचौलियों ने सरकार को 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक की चपत लगाई है।
उड़द की सरकारी खरीद में धांधली की शिकायत पर जांच शुरू हो चुकी है। नेफेड अर्थात भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ द्वारा संचालित सरकारी क्रय केंद्रों की जांच के लिए नेफेड के द्वारा संभल, मुरादाबाद, अमरोहा में एक जांच टीम भेजी गई है। जांच टीम उड़द खरीद पर हुए गोलमाल की जांच के लिए बयान दर्ज कर रही है। विदित रहे कि केंद्र सरकार के निर्देश पर दोनों विभाग के सरकारी क्रय केंद्रों को क्षेत्रीय किसानों से 5400 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य पर उड़द की खरीद का निर्देश दिया गया था।
खरीद के लिए बाकायदा सरकारी क्रय-केंद्रों फलेक्स बोर्ड लगाकर पंजीकृत किसानों को सूचित किया गया। आरोप है कि खरीद व भंडाराण केवल कागजों में हुआ। इस मामले में सामाजिक संस्था यूजीएमसी फांउडेशन ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय दिल्ली और प्रदेश सरकार के पास शिकायत की थी। जनपद संभल, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा के सरकारी केंद्रों पर उड़द की खरीद सीधे किसानों से नहीं की गई। कहा जा रहा है कि बिचौलियों के माध्यम से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर उड़द खरीदा गया था। इसमें 2400 रुपये प्रति क्विंटल का मुनाफा कमाया। इस शिकायत की हकीकत क्या है? इस बारे में अब जांच हो रही है।