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सूतक के चलते बंद रहे मंदिरों के कपाट, सूर्यग्रहण के बाद खुले

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दीपावली के त्योहार के बाद सुबह लोग मंदिरों के दर्शन के लिए पहुंचते थे लेकिन इस बार मंदिरों में सन्नाटा रहा। सूतक के चलते मंदिरों के कपाट भी बंद रहे। शाम को साल का अंतिम सूर्यग्रहण हुआ। मालूम हो कि सुबह 4.26 बजे सूतक काल लग गया था, जबकि शाम को 5.26 के बाद मंदिरों के द्वार खुले थे। वहीं, घरों में भजन कीर्तन के साथ भगवान का जाप किया गया।
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मंगलवार शाम सूर्यग्रहण हुआ। जिसके चलते सुबह से ही मंदिर में पूजा अर्चना कर उनके कपाट बंद कर दिए गए। जहां पर ग्रहण का सूतक काल सुबह 4.26 बजे लगने के चलते कपाट बंद करने से पहले मंदिरों में विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। इस विशेष पूजा अर्चना के बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए।
इसके बाद मंदिरों में ही नहीं घरों में भी विशेष पूजा अर्चना करने के साथ ही भगवान के मंत्रों का जाप किया गया। घरों में स्थित मंदिरों पर कपाट न होने के कारण उनके पर्दे डाले गए थे। गर्भवती महिलाएं कमरे में ही रहीं। सूर्य ग्रहण के दौरान बाहर नहीं निकली। कुछ परिवारों ने सूर्य ग्रहण के दौरान न तो भोजन पकाया और न ही इस दौरान कुछ खाया। साथ ही जो भोजन पका हुआ था, उसमें तुलसी के पत्ते डाल रखे थे। दिन भर परिवार की महिलाएं भजनों व भगवान के मंत्रों का जाप करती रहीं।
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देर शाम को ग्रहण काल समाप्त होने के बाद लोगों ने अपने घर व मंदिरों की धुलाई की। साथ ही विशेष साफ सफाई भी की गई। जबकि कुछ लोग विभिन्न गंगा घाटों पर पहुंचे और वहां पर गंगा स्नान कर विधि विधान से पूजा अर्चना की। मान्यता है कि ग्रहण के बाद बच्चे, बुजुर्गों व मरीजों को छोड़कर किसी को कुछ खाना और पीना नहीं चाहिए। ग्रहण के दौरान आराध्य के नाम का मन में जप करना चाहिए।
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