संभल। गौरव गुर्जर बात न करने पर धमकाता है। कहता है कि यदि बात नहीं करेगी तो गोली मार देगा और खुद भी जान दे देगा। यह बात कुछ दिन पहले छात्रा प्रतीक्षा ने अपनी मां रजनी बताई थी। मां ने बेटी की बात को गंभीरता से नहीं लिया। यह बात छात्रा की मां ने बताई हैं।
रजनी ने बताया कि शनिवार की सुबह करीब आठ बजे उनकी बेटी स्कूटी से कॉलेज गई थी। दोपहर को एक बजे तक लौटने की बात कही थी। जब एक बजे तक नहीं लौटी तो फोन लगाया था लेकिन फोन नहीं उठा। दोपहर पौने तीन बजे करीब गोली लगने की सूचना मिली। रजनी ने बताया कि युवक काफी समय से उनकी बेटी के पीछा कर रहा था। उसके बेटी ने कई बार धमकी देने की बात कही थी, लेकिन कभी गंभीरता से नहीं लिया। बोली, यदि बेटी की बात सुन ली होती तो शायद आज यह घटना न होती।
गांव से एक किलोमीटर दूर हुई घटना
पाकबड़ा के नजदीक स्थित कॉलेज से पढ़कर लौट रही छात्रा प्रतीक्षा को आरोपी ने छात्रा के गांव से करीब एक किलोमीटर दूर सरकारी नलकूप के नजदीक रोका था। इससे यह भी साफ हो गया कि आरोपी पहले से ही वहां मौजूद था और छात्रा के आने का इंतजार कर रहा था। दूर खेतों में काम कर रहे किसानों ने बताया कि काफी देर तक तो छात्रा और युवक में बात हुई थी। इसके बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी। जब मौके पर पहुंचे तो छात्रा अलग पड़ी थी और आरोपी की जान जा चुकी थी। इसके बाद ही पुलिस को सूचना दी गई।
स्कूटी पैदल लेकर आती दिखाई दी थी छात्रा
कुछ राहगीरों ने घटना की जानकारी होने पर बताया कि छात्रा घटनास्थल से कुछ दूर पहले पैदल स्कूटी लेकर जाती दिखाई दी थी। जिससे यह लगा कि शायद स्कूटी की चार्जिंग खत्म हो गई है। और युवक को भी सरकारी नलकूप के नजदीक खड़े हुए देखा था। नजदीक में ही युवक की बाइक भी खड़ी थी। एएसपी श्रीश्चंद ने बताया कि स्कूटी में चार्जिंग खत्म थी या नहीं इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है। वह थाने में खड़ी कराई गई है।
सबसे छोटा था गौरव गुर्जर, प्रतियोगी परीक्षा की कर रहा था तैयारी
गौरव गुर्जर अपने दो भाई और एक बहन में सबसे छोटा था। बीए की पढ़ाई करने के साथ ही प्रतियोगी परीक्षा की भी तैयारी कर रहा था। शनिवार की दोपहर 12 बजे मां गीता को बताकर गया था कि वह किसी काम से जा रहा है, लेकिन यह नहीं बताया था कि कहां जा रहा है। गौरव की मौत की सूचना मिलने पर परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि गौरव की बहन अंशु की शादी हो गई है। बड़ा भाई सौरभ है। गौरव सबसे छोटा था तो परिजनों का लाडला था। गांव के लोग भी गौरव के इस कदम से अचंभित हैं कि उसने यह कदम क्याें उठाया।