शहर के किनारे पर धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समेटे टनशेड और तंबुओं का एक नया शहर बस गया है। इसमें खाने-पीने से लेकर मनोरंजन तक के विशेष इंतजाम हैं।
करीब डेढ़ लाख से अधिक की आबादी वाले चंदौसी शहर में करीब दो सौ कृष्ण मंदिर होने के कारण इसे मिनी वृंदावन यानी कन्हैया की नगरी कहा जाता है। लेकिन, अब यह नगरी गणपति बप्पा गजानन के रंग में सराबोर होने को तैयार है। तीन सितंबर से शुरू होने वाली श्रीगणेश चौथ मेले का काउंटडाउन शुरू हो गया है। मेला परिसर में दुकानें आवंटित होने के साथ काफी संख्या में दुकानें लग भी चुकी हैं।
टेंट और तंबुओं के साथ साथ टीनशेड की दुकानें बनाई जाने के कारण मेला परिसर एक शहर का आकार ले चुका है। एक अलग शहर की साज सज्जा देखते ही बनती है। दुकानों के साथ साथ रास्तों का भी खास ध्यान रखा गया है। इसके अलावा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मेला कोतवाली स्थापित की जा रही है। बड़े बड़े झूलों व खेल तमाशों के लिए मेला के एक छोर पर स्थान आवंटित किया गया है।
मेहमानों के स्वागत की तैयारियां जोरों पर
चंदौसी(ब्यूरो)। श्रीगणेश रथयात्रा देखने के लिए मेहमानों की आवभगत को लेकर घरों में तैयारियां तेज हो गई हैं।
बता दें कि श्रीगणेश रथयात्रा देखने के लिए प्रतिवर्ष करीब सात लाख से अधिक लोग पहुंचते हैं। इसमें करीब बीस फीसदी से अधिक मेहमान होते हैं, जो चंदौसी में रिश्तेदारों के यहां ठहरते हैं। इसके अलावा कुछ होटलों, धर्मशालाओं में ठहरते हैं, शेष लोग प्लेटफार्म और गणेश मेला परिसर में ही रात गुजार देते हैं। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि अक्सर लोग तीज त्योहारों पर घर लौटते हैं, ससुराल से महिलाएं मायके जाती हैं लेकिन चंदौसी में यह स्थिति मेला श्रीगणेश चौथ में आती है।
शहर में हिंदू हो या मुसलमान, सिख या फिर ईसाई, सभी के परिवारों में अपने मेहमानों के ठहरने और उनके खाने-पीने की तैयारियों जोरों पर हैं।
विकासनगर मौलागढ़ की नीलम रस्तोगी ने बताया कि मेले की तैयारियां दो महीने पहले से ही शुरू हो जाती हैं। बंगलूरू से इस बार मेरी बहन व बहनोई और उनके बच्चों के आने की सूचना मिल गई है। फड़ियाई बाजार की माधुरी वार्ष्णेय ने बताया कि मेरी बेटी बाहर हास्टल में रहती हैं।
वे मेले में अवकाश लेकर आते हैं और कुछ समय परिवार के साथ बिताते हैं।
प्रगति विहार निवासी सुमन शर्मा ने बताया कि महाराष्ट्र के बाद देश में चंदौसी का श्रीगणेश मेला ही आता है, स्वचलित झांकियां देखने लायक होती हैं। इससे देखने के काफी रिश्तेदार भी आते हैं। मोती मोहल्ले की पूनम वैश्य भी मेले की तैयारियों में व्यस्त दिखीं। बोलीं-मेरा भाई और उनका परिवार रुद्र प्रयाग (चिमतौली) से श्रीगणेश मेले देखने आएंगे। बड़ा महादेव मोहल्ले की दिव्या वार्ष्णेय और शताक्षी प्रियंका ने बताया कि मेले में रथयात्रा का विशेष महत्व है। उस दिन घर में त्योहार मनता है।