चंदौसी। मुंबई की प्रसिद्ध देवनार मंडी में संभल व आसपास जिले के बकरों की खास डिमांड रहती है। जिले के बकरा व्यापारियों को मंडी में सबसे पहले स्थान मिलता है। इस वर्ष भी बकरीद की बिक्री के लिए संभल से मुंबई की देवनार मंडी में करीब 250 व्यापारी बकरे लेकर गए हैं, लेकिन बकरा व्यापारी बारिश के चलते अभी तक दिल्ली की अपेक्षा मुंबई में मंदी बता रहे हैं।
ईद के त्योहार पर कुर्बानी के बकरों की खरीदारी को हर साल मुंबई मंडी में मुरादाबाद और संभल के बकरों की बहुत मांग रहती है। राजस्थान हरियाणा, मध्यप्रदेश, यूपी से बकरे बिकने के लिए जाते हैं। इनमें यूपी के विशेष तौर से संभल व आसपास के जनपदों से जाने वाले बरबरी नस्ल के बकरों की अधिक डिमांड रहती है। इस नस्ल के बकरे छोटे और अत्यधिक खूबसूरत होने के कारण खरीदारों की पहली पसंद रहते हैं। राजस्थान, हरियाणा के अलवर और तोतापरी नस्ल के बकरों के मुकाबले इनकी कीमत भी कम होती है। जनेटा निवासी बकरा व्यापारी इमरान कुुरैशी ने बताया कि इस बार मुंबई मंडी में करीब एक लाख 55 हजार बकरा बिक्री के लिए पहुंचा है। इस बार संभल के चंदौसी, बहजोई, संभल शहर, सरायतरीन, जनेटा, नरौली, मुरादाबाद कुंदरकी,बिलारी थांवला, रामपुर शाहबाद, बिजनौर से काफी संख्या में पशु व्यापारी मुंबई बकरे ले
यूपी के व्यापारियों को इस बार रही मंडी में परेशानी
बकरा व्यापारी इमरान कुरैशी ने बताया कि मुंबई मंडी में विगत वर्षों में मुरादाबाद मंडल के बकरा व्यापारियों को बहुत महत्व दिया जाता था। सबसे पहले मुरादाबाद और संभल के व्यापारियो को मंडी में स्थान मिलता था। लेकिन इस बार बहुत परेशानी का सामना रहा है। मंडी में लोकल के दलाल बहुत सक्रिय हैं। इस कारण जगह मिलने में बहुत कठिनाई हुई है। बड़ी मुश्किल के बाद व्यापारियों को जगह मिल सकी है। लगातार तीन दिन से बारिश होने के कारण खरीदार कम आए हैं। अभी तक मंडी में मंदी है। तीन दिन शेष बचे हैं, यदि बारिश नहीं हुई तो अच्छी बिक्री की उम्मीद है। जिले मोहम्मद नईम, मोहम्मद मुकीम, मोहम्मद बिलाल, जासमीन,जमील अहमद,मोहम्मद लाल, भूरे, स्वालेहीन आदि व्यापारी अपने बकरे लेकर गए हुए हैं।
दो हजार रुपए खर्च आता है एक बकरे के मुंबई पहुंचने में
मुंबई मंडी तक पहुंचने में बकरों को करीब 1450 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। बकरा व्यापारी मिलकर कंटेनर में बकरों को लेकर मुंबई जाते है। एक कंटेनर में करीब 200 बकरों को सवार किया जाता है। एक बकरे पर करीब दो हजार रूपए का खर्चा होता है। वहीं मुंबई में एक बकरे पर 500 रुपए मंडी शुल्क लगता है। रास्ते में कई स्थानों पर ठहर कर बकरों को टहलाया और आराम दिलाया जाता है। भारी परेशानी के बाद बकरे मंडी पहुंचते हैं। व्यापारी रास्ते के लिए बकरों का चारा ओर दवाई आदि लेकर जाते है। रास्ते में थकान के कारण बकरे बीमार भी हो जाते है।