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Sambhal News: कहीं पेड़ के नीचे लगती हैं कक्षाएं, कहीं जर्जर भवनों से हादसे का रहता है खतरा

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संभल। जिले के घोसीपुरा, करछली और अर्जुनपुर खुर्द जैसे गांवों में संचालित होने वाले परिषदीय विद्यालय विभागीय उपेक्षा के शिकार हैं। सात-आठ महीने पहले तक जर्जर बिल्डिंग हुआ करती थी जिसको तोड़ दिया गया लेकिन अब बिल्डिंग बनवाना ही भूल गए।
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घोसीपुर का प्राथमिक विद्यालय पंचायत भवन में संचालित होता है। हर दिन 30-35 बच्चे उपस्थित रहते हैं। करछली का प्राथमिक विद्यालय एक ग्रामीण के दालान में संचालित होता है। इस विद्यालय में 55 बच्चे पंजीकृत हैं। गांव अर्जुनपुर खुर्द के विद्यालय की बिल्डिंग तो तोड़ दी गई है, लेकिन पेड़ लगे हैं। इन्हीं पेड़ की छांव में विद्यालय चलता है।
बारिश होने पर आकस्मिक अवकाश बच्चों को मिल जाता है। यह स्थिति जिले के कई अन्य विद्यालय में भी बनी हुई है। जर्जर विद्यालय भी प्रत्येक ब्लॉक में हैं। बारिश के दौरान कई विद्यालयों से पानी तक टपकता है। लिंटर से सीमेंट छूटकर भी गिरता है। हालांकि बात कागजों की करें तो उनमें सब ठीक-ठाक है।
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जिले में 1289 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 814, उच्च प्राथमिक विद्यालय 253 और कंपोजिट विद्यालय 222 शामिल हैं। इन विद्यालयों में 5282 शिक्षक हैं। इसमें 1580 शिक्षामित्र व 296 अनुदेशक भी शामिल हैं जबकि 150432 बच्चे पंजीकृत हैं।
विद्यालयों की संख्या के सापेक्ष प्रत्येक विद्यालय में चार शिक्षक की तैनाती जिले में है। इससे स्पष्ट है कि शिक्षकों की भी जिले के परिषदीय विद्यालयों में कमी है। 30-35 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक तो शायद ही किसी विद्यालय में पूरा हो। विभागीय खामियों का खामियाजा बच्चों को उठाना पड़ रहा है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
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