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धान की रोपाई करने गए छह बालक तालाब में डूबे, चार को बचाया, दो की जान गई

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धनारी (संभल)। धान की रोपाई करने गए छह बालक तालाब में नहाते समय डूब गए। इसमें चार को बचा लिया गया लेकिन दो की मौत हो गई। इसकी जानकारी परिजनों को हुई तो कोहराम मच गया। बालकों के शव घर पहुंचे तो ग्रामीणों का तांता लग गया।
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मंगलवार की दोपहर धनारी थाना क्षेत्र के गांव भिरावटी निवासी ताराचंद्र और दिनीराम के खेत में धान की रोपाई हो रही थी। दोपहर तीन बजे करीब धान की रोपाई करने गए बालक नजदीक में स्थित तालाब में नहाने चले गए। इसमें ताराचंद्र का (11) वर्षीय बेटा भानू, दिनीराम का (10) वर्षीय बेटा पवन उर्फ छोटे, 12 वर्षीय गुड्डू, 13 वर्षीय अखिलेश और गांव निवासी धर्मेंद्र व मोहरपाल शामिल थे। बालक तालाब में नहाते समय डूबने लगे तो तालाब के बाहर खड़ा इन बालकों का साथी प्रशांत ने डूबते हुए देख लिया। शोर मचाने पर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े।
आनन-फानन गुड्डू, अखिलेश, धर्मेंद्र और मोहरपाल को बचा लिया लेकिन भानू और पवन की डूबने से मौत हो गई। भानू के पिता ताराचंद्र ने बताया कि उनके बेटे और भतीजे पवन की डूबने से मौत हुई है।
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बताया कि वह और उनका भाई धान की रोपाई के लिए बच्चों को खेत पर ले गए थे। इसमें उनके बेटा और तीन भतीजे भी थे। तालाब में नहाते समय बेटा और भतीजा हादसे का शिकार हो गए। बताया कि भानू कक्षा दो का छात्र था जबकि पवन पहली कक्षा में पढ़ाई कर रहा था।
वहीं दूसरी ओर हादसे की जानकारी होने पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है।
बच्चों को ले जाने का दोनों पिता को अफसोस
ताराचंद्र और दीनीराम सगे भाई हैं। धान की रोपाई के लिए यह दोनों भाई अपने अपने बच्चों को भी ले गए थे। हादसे के बाद जब दोनों पिता अपने घर पहुंचे तो रोते हुए एक ही बात कह रहेे थे कि न धान की रोपाई कराने के लिए ले जाते और न बच्चों की जान जाती। दरअसल ताराचंद्र का बेटा भानू अपने तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। गांव के निजी विद्यालय में पढ़ाई कर रहा था। मंगलवार को विद्यालय की छुट्टी थी इसलिए पिता ने भी धान की रोपाई करने लिए कह दिया। दोपहर के समय जब गर्मी लगी तो नहाने के लिए सभी रोपाई कर रहे बालक तालाब पर चले गए। वहां हादसे का शिकार हो गए। भानू की मां विमलेश बेटे को याद कर बेसुध हो गई। वहीं पवन अपने परिवार में तीन भाई और एक बहन में सबसे छोटा था। मां मीना का लाडला था। बेटे का शव घर पहुंचा तो मां बेहोश हो गई। जब होश आया तो धान की रोपाई को ही कोसती नजर आई। पवन भी विद्यालय की छुट्टी के कारण खेत पर अपने पिता के साथ चला गया था और धान की रोपाई कराने लगा। इसी दौरान नहाने गया और जान चली गई। दोनों बालकों की मौत का इन दोनों के पिता को बेहद अफसोस है। वह वक्त को कोस रहे हैं। न बच्चों को रोपाई के लिए ले जाते और न उनकी जान जाती।
मिट्टी खोदने से हो गए हैं गहरे गड्ढे, वही बने जानलेवा
ग्रामीणों के अनुसार जिस तालाब में बच्चों की डूबने से मौत हुई है, उसमें जगह जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। ग्रामीण तालाब सूखने पर मिट्टी निकाल लेते हैं। जब बरसात में पानी भर जाता है तो यह गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं। इन्हीं गड्ढों में डूबने से दो बच्चों की जान गई है। ग्रामीण इन्हीं गड्ढों को बच्चों की मौत का कारण मान रहे हैं।
प्रशांत न देखता तो चार बालकों को बचाना होता मुश्किल
धान की रोपाई छोड़कर गर्मी से राहत पाने के लिए छह बालक तालाब में घुसे तो इनका साथी प्रशांत तालाब के किनारे ही खड़ा होकर इन्हें देख रहा था। प्रशांत ने बताया कि जब उसके साथी नहाते हुए तालाब में थोड़ा अंदर गए तो सभी डूबने लगे। पहले तो समझ नहीं आया कि यह डूब रहे हैं। जब सभी ने बचाने के लिए आवाज लगाई तो शोर मचाया। कुछ दूरी पर जो लोग मौजूद थे वह दौड़कर आए और बचाने के लिए तालाब में कूद गए। चार बालकों को तो बाहर निकाल लिया गया लेकिन दो को बचाने में देरी हो गई। थोड़ी देरी के कारण ही दोनों बालकों की जान चली गई।
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