संभल। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की का टोटा होने की वजह से मरीजों को भटकना पड़ रहा है। वर्षों से स्वीकृत 23 पदों में से 15 पद खाली हैं। ऐसे में गंभीर मरीज पहुंचने पर रेफर कर दिया जाता है।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 23 पद स्वीकृत हैं। इसमें 8 ही पदों पर चिकित्सकों की तैनाती है। इसमें बाल रोग विशेष की तैनाती तो है लेकिन अन्य किसी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। टीबी रोगियों के लिए चेस्ट स्पेशलिस्ट की तैनाती नहीं होने से मरीजों को रेफर करना पड़ता है। महीने में 10 से ज्यादा मरीज रेफर किए जा रहे हैं। इसी तरह ईएनटी, ह्दय, न्यूरोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया, गायनोलॉजिस्ट जैसे जरूरी चिकित्सकों की भी तैनाती नहीं है। सामान्य बीमारियों का ही उपचार मिल पा रहा है।
मानसिक तनाव के बढ़ रहे मामले
जिला अस्पताल में साइकेट्रिस्ट के पद पर तैनाती नहीं है। सीएमएस का कहना है कि महीने में 20 से 25 मरीज हर महीने आते हैं। मजबूरन रेफर किया जाता है। यही समस्या न्यूरोलॉजिस्ट के तैनात नहीं होने से बनी हुई है। दिमाग की मामूली दिक्कत होने पर भी मरीज को रेफर करना पड़ता है। सीएमएस ने बताया कि मानसिक तनाव और मानसिक बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या काफी है। लेकिन साइकेट्रिस्ट की तैनाती नहीं है। इसलिए दवाएं भी नहीं दी जाती हैं।
ऑपरेशन के लिए सर्जन तैनात नहीं
जिला अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सर्जरी, बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉलिस्ट, सर्जन और दो फिजिशियन की तैनाती है। गायनोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है लेकिन सीएचसी में तैनात सामान्य चिकित्सक द्वारा ही ऑपरेशन कराया जा रहा है। सीएचसी से ही एनेस्थीसिया चिकित्सक को बुलाया जाता है। विशेषज्ञों की तैनाती तो नहीं है। प्रशिक्षण पाए चिकित्सक से ऑपरेशन कराए जा रहे हैं। इन्हें अटैचमेंट कर दिया गया है। सीएचसी में फिलहाल पद रिक्त हैं।
कोट
दवाएं सभी बीमारियों की उपलब्ध हैं लेकिन विशेषज्ञों द्वारा दी जाने वाली दवाओं को नहीं दिया जाता है। इसलिए मरीज को रेफर कर देते हैं। चिकित्सकों की तैनाती के लिए कई बार शासन के लिए पत्राचार किया जा चुका है। -डॉ. राजेंद्र सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल, संभल।