चंदौसी (संभल)। शासन की अनदेखी की चलते जिले के पांच संस्कृत विद्यालयों में श्लोकों की गूंज नहीं सुनाई देती। उपेक्षा का शिकार तीन विद्यालय बंद हैं, जबकि दो बंद होने की कगार पर हैं। वर्तमान में पांचों विद्यालय अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहे हैं।
जनपद में माध्यमिक संस्कृत शिक्षा विभाग के पांच और दो वित्तविहीन संस्कृत विद्यालय हैं। जिनमें एक महाविद्यालय है। संस्कृत के प्रचास और प्रसार के लिए विद्यालय स्थापित कराए गए थे। कभी इन विद्यालयों में संस्कृत के श्लोक गूंजते थे, लेकिन वर्तमान में संस्कृत को ज्यादा तरजीह नहीं दी जा रही। शासन की ओर से भी इन विद्यालयों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और न ही इन विद्यालयों में संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे। जिस वजह से सभी संस्कृत विद्यालय उपेक्षा का शिकार हो गए। ऐसे में माध्यमिक संस्कृत शिक्षा विभाग का चंदौसी के घंटाघर स्थित श्री सनातन धर्म संस्कृत माध्यमिक विद्यालय का संचालन बंद है। जबकि श्री कल्याण संस्कृत माध्यमिक विद्यालय दबथरा हरलाल में सिर्फ पांच छात्र पंजीकृत है। इन छात्रों की जिम्मेदारी के लिए एक शिक्षक तैनात है। इसके अलावा श्री शंकर संस्कृत विद्यालय मणिकावली में 20 छात्र पंजीकृत है। यहां भी एक शिक्षक की तैनाती है। इसके अलावा वित्तविहीन श्री देवी दयाल संस्कृत विद्यालय असदपुर और श्री गर्ग संस्कृत विद्यालय कैथल में एक भी छात्र पंजीकृत है। जिसके चलते दोनों का संचालन बंद है।
काफी समय से नहीं हुई शिक्षकों की तैनातीजिले के माध्यमिक माध्यमिक संस्कृत शिक्षा विभाग के पांच और दो वित्तविहीन विद्यालयों सरकार की उपेक्षा के चलते अस्तित्व बचाने के लिए जूझना पड़ रहा है। विद्यालयों में काफी समय से शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई है। वर्तमान में माध्यमिक संस्कृत शिक्षा विभाग एक और दो वित्तविहीन विद्यालय बंद हैं। जबकि दबथरा हरलाल स्थित श्री कल्याण संस्कृत विद्यालय में एक शिक्षक, मणिकावली स्थित श्री शंकर संस्कृत विद्यालय में एक, नगला अजमेरा गांव स्थित श्री भागीरथी माध्यमिक विद्यालय में एक और चंदौसी के सीता आश्रम स्थित श्री रधुनाथ आश्रम महाविद्यलय में मात्र एक शिक्षक की तैनाती है।
भवन भी हो चुके हैं जर्जर
शासन की अनदेखी के चलते माध्यमिक संस्कृत शिक्षा विभाग के सभी विद्यालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। साथ ही विद्यालयों में अन्य व्यवस्थाएं और पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। जिसकी वजह से छात्रों को मोह भंग होता जा रहा है।
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संस्कृत विद्यालयों को प्रोजेक्ट अलंकार योजना में शामिल किया गया है। जिसके तहत इन विद्यालयों की दशा सुधारी जाएगी। साथ ही जिन विद्यालयों में छात्र संख्या कम है। उन विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापकों को पत्र भेजा गया है। -वेदराम कौशल, डीआईओएस