चंदौसी (संभल)। शिवभक्त प्रमोद गुरु कांवड़ (गंगाजली) बनाने में एक्सपर्ट हैं। पिछले 35 वर्षों से कांवड़ियों की निशुल्क कांवड़ बनाकर सेवा कर रहे हैं। जो शिवभक्त सामान लेकर उनके पास जाता है, वह उसकी कांवड़ एक घंटे में तैयार करके देते हैं। प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर 110 से 120 कांवड़ बनाते हैं। प्रमोद गुरु ने बताया कि मैं इसे ही भगवान शिव की सेवा मानता हूं और निस्वार्थ भाव से काम करता हूं। ब्रजनगर काॅलोनी निवासी प्रमोद गुरु शिवभक्तों की निशुल्क कांवड तैयार कर भगवान भोलेनाथ की सेवा कर रहे हैं। वर्तमान में सीता रोड पर डिस्पोजल की दुकान चलाते हैं। वह पिछले 35 वर्षों से 15 वर्षीय की आयु से कांवड़ बना रहे हैं। वह बताते हैं कि जब 15 वर्ष के थे और तब महाशिवरात्रि पर कांवड़ में राजघाट से गंगाजल भरकर जाने की इच्छा हुई, मगर पैसे नहीं होने पर उन्होंने इधर-उधर से कुछ पैसे एकत्र हुए। इसके बाद कांवड का सामान खरीदकर गणेश काॅलोनी पहुंचे। वहां एक वृद्ध कांवड़ बनाते थे। मगर एक दिन व एक रात इंतजार करने के बाद भी उनका नंबर नहीं आया, तो दूसरे दिन उन्होंने बुजुर्ग व्यक्ति से पूछकर अपनी कांवड़ तैयार की। बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि तुमने तो मेरे से भी अच्छी कांवड़ बनाई है। तब उनके मन में सवाल आया कि जैसे में अपनी कांवड़ को लेकर परेशान हुआ है, वैसे कितने शिव भक्त अपनी-अपनी कांवड़ बनवाने को परेशान होते होंगे, तभी से वह महाशिवरात्रि पर शिवभक्तों के लिए निशुल्क कांवड़ बनाकर दे रहे हैं और इसे ही भगवान शिव की सेवा मानते हैं।
वह बताते है कि हर महाशिवरात्रि पर 100 से 120 निशुल्क कांवड़ बनाते हैं और महाशिवरात्रि से 15 दिन पहले ही कांवड़ बनाने का कार्य प्रारंभ कर देते हैं। उन्हें एक कांवड़ बनाने में एक घंटे का समय लगता हैं। महाशिवरात्रि से चार दिन पहले रात 12 बजे तक कांवड़ बनाते हैं।
20 वर्ष राजघाट से लगातार कांवड़ में जल लाए
प्रमोद गुरु 15 वर्ष की आयु से 20 वर्षों तक राजघाट से कांवड़ में जल लेकर आए थे। एक बार राजघाट से कांवड़ लाते समय उसके रिश्तेदार हादसे में घायल हो गए। हालत गंभीर पर उनके उपचार के लिए मुरादाबाद चले गए। इस दौरान उनकी कांवड़ भी गुम हो गई। इसके बाद से उन्होंने राजघाट से कांवड़ लानी बंद कर दी। इसे लगभग दस वर्ष का समय बीत चुका है।
झांकी बनाते पड़ा गुरु नाम
प्रमोद गुरु पिछले काफी समय से गणेश चौथ मेले पर निकलने वाली शोभायात्रा के लिए झांकियां तैयार करते हैं। वह हनुमान जी की झांकी के डायरेक्टर भी हैं। लगातार लंबे से काम करने के साथ लोग गुरु नाम से पुकारने लगे और उनका नाम प्रमोद कुमार के स्थान पर प्रमोद गुरु पड़ गया। आज पूरा शहर उन्हें गुरु के नाम से जानता है।