उनको अंतिम विदाई देने के लिए देशभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान सुधीश तुम्हारा यह बलिदान-याद रखे हिंदुस्तान, जब तक सूरज-चांद रहेगा सुधीश तुम्हारा नाम रहेगा के गगनभेदी नारों की गूंज रही। उनके भाई अनिल कुमार ने उन्हें मुखग्नि दी। इससे पहले सेना की टुकड़ी ने उन्हें रायफलों से सलामी दी।
संभल जिले के पनसुखा मिलक गांव निवासी सुधीश कुमार(24) जम्मू-कश्मीर के राजोरी जिले में भारत-पाकिस्तान बार्डर पर छह राजपूत रेजिमेंट में सिपाही थे। वे पाक सेना की ओर से चलाए स्नाइपर शॉट की गोली लगने से रविवार को शाम 4.40 बजे शहीद हुए थे। सेना के विमान से उनका पार्थिव शरीर मंगलवार को बरेली लाया गया।
इसके बाद दोपहर 2.52 बजे सेना के ही हेलीकॉप्टर से उनका पार्थिव शरीर उनके गांव लाया गया। यहां पर आसपास के गांवों के लोग, जिला प्रशासन के अधिकारी और राजनीतिक हस्तियां पहले से मौजूद थीं। परिजन और ग्रामीण मुख्यमंत्री के आने पर अंतिम संस्कार करने की जिद पकड़ ली। ग्रामीणों के तेवर देख प्रशासन परिजनों की मान-मनौव्वल में जुट गया। लेकिन परिजन अंतिम संस्कार करने को राजी नहीं हुए। इस पर समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष फिरोज खां ने मुख्यमंत्री के सचिव को अवगत कराया।
पूर्व मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह यादव और जिलाध्यक्ष फिरोज खां शहीद परिवार को सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद अपर जिलाधिकारी आरपी यादव ने शहीद परिवार के लिए लखनऊ में मुख्यमंत्री से मिलवाए के कार्यक्रम की जानकारी दी। इसके बाद परिजन शाम चार बजे अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए। इसके बाद देशभक्तों का कारवां नम आखों के बीच शहीद सुधीश को अंतिम विदाई देने के लिए खेल मैदान की ओर बढ़ने लगा। इस दौरान सुधीश तुम्हारा यह बलिदान-याद रखे हिंदुस्तान, जब तक सूरज-चांद रहेगा सुधीश तुम्हारा नाम रहेगा, भारतीय सेना जिंदाबाद-पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों से पूरा माहौल देशभक्तिमय हो गया।
इसके बाद खेल के मैदान पर अधिकारियों और नेताओं ने पुष्पचक्र चढ़ाए और सेना की टुकड़ी ने रायफलों से शहीद को सलामी दी। इसके बाद करीब साढ़े पांच बजे सुधीश के सगे भाई अनिल कुमार ने मुखाग्नि दी।