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शहीद के गांव से उठी पाकिस्तान से बदला लेेने की आवाज

Tue, 18 Oct 2016 12:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
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‌ विलाप
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अब उनके गांव पनसुखा मिलक से परिजनों और ग्रामीणों ने पाक से बदला लेने की आवाज उठाई है। गांव में सुबह से शहीद के घर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया। राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और पदाधिकारियों के साथ सरकारी अधिकारी भी गांव पहुंचे। 
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पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए रविवार को एक बार फिर गोलीबारी की। इसमें छह-राजपूत रेजीमेंट के जवान सुधीश कुमार शहीद हुए हैं। उन पर पाकिस्तान ने उस वक्त स्नाइपर शॉट चलाया जब वह एलओसी से 250 मीटर दूरी पर बनी फारवर्ड पोस्ट पर देश की रक्षा के लिए मोर्चा संभाले हुए थे। रविवार को शाम 4.30 बजे उनकी शहादत हुई। सेना की ओर से अधिकारिक मैसेज आने के बाद परिजनों को शहादत की जानकारी मिली तो एक पल के लिए बड़े भाई अनिल और पिता ब्रह्मपाल सिंह सन्न रह गए। घर की महिलाओं को नहीं बताया ताकि अचानक किसी को सदमा न लगे।

रात लंबी थी और शव आने में वक्त लग सकता था। हालांकि मीडिया प्रतिनिधियों को पता लग था। रात्रि 11 बजे से मीडिया प्रतिनिधि गांव पहुंचने लगे। परिजन चाहते थे कि रात में घर की महिलाओं को कुछ न बताया जाए। इसलिए वे गांव में मुख्य रास्ते पर खड़े हो गए, मीडिया प्रतिनिधियों और पुलिस के अधिकारियों को रास्ते में रोक लिया। भोर में चार बजे तक गांव के अधिकतर लोगों को सुधीश की शहादत का पता लग गया। करीबी गांवों से सुधीश के रिश्तेदार आना शुरू हो गए। यह सिलसिला सोमवार को देर रात तक जारी रहा। 
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परिजनों ने कहा कि शांति-शांति की बातें करते करते देश के तमाम सपूत शहीद हो गए। अब शांति नहीं सबक सिखाने की जरूरत है। आर-पार की लड़ाई होगी तभी पाकिस्तान बाज आएगा। शहीद के पिता ब्रह्मपाल सिंह और मां संतो देवी ने कहा कि हम शांति-शांति की बातें करते रहे और वे देश की सीमा घुसकर सैनिकों को शहीद करते रहे। आखिर ऐसा कब तक चलेगा। हमें शहीद सैनिकों की जान का हिसाब चाहिए।

मां के चहेते थे सुधीश, फोन पर हर रोज होती थी बात 
संभल। पांच भाई बहनों के परिवार में सुधीश अपनी मां के चहेते थे। ड्यूटी पर जाने से पहले और आने के बाद मां से जरूर बात करते थे। रविवार को दोपहर भी उसने मां से बातचीत की। मां संतो देवी ने बताया कि बेटे को पनीर की सब्जी और रोटी बहुत ज्यादा पसंद थी। वे जब भी छुट्टी पर आते थे मेरे हाथ की बनी पनीर की सब्जी जरूर खाते थे। वे मांस-मछली और शराब से परहेज करते थे। 
सुधीश कहते थे- हम तो लड़ने आए हैं, देश के लिए लड़ेंगे 
संभल। एलओसी पर जहां सुधीश की तैनाती थी। वहां हर वक्त दुश्मन की गोली का खतरा रहता था। जब पाकिस्तान की सीमा पर तनाव बढ़ा तो परिजनों को उनकी फिक्र होने लगी। पिता ब्रह्मपाल सिंह ने बताया कि सुधीश की उनसे बहुत कम बात होती थी लेकिन वह मां से जब-जब उनकी बात होती थी वे उन्हें सावधान करती रहती थीं। इस पर सुधीश कहते थे-सीमा पर हम तो देश के लिए लड़ने आए हैं, देश के लिए लड़ेंगे। सुधीश के पिता ने बताया कि इधर के एक महीने से उनका परिवार से ज्यादा देश से लगाव होने लगा था। वे पाक को सबक सिखाना चाहता था। 

मुख्यमंत्री ने की 20 लाख की सहायता की घोषणा
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शहीद जवान की पत्नी को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर दी है। मंगलवार को शहीद की पत्नी को इस राशि का चेक दे दिया जाएगा। शाम पांच बजे राजोरी से शहीद का शव गांव के लिए रवाना हो गया है, मंगलवार सुबह छह बजे तक पहुंचने की उम्मीद है। मंगलवार को ही सैनिक सम्मान के साथ शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। - भूूपेंद्र एस चौधरी, डीएम संभल। 
शहीद के परिजनों से गांव जाकर मिला हूं। मंगलवार को शहीद जवान के शव का सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। पुलिस की गार्द भी सलामी देगी।-बालेंदु भूषण, एसपी संभल।
सरकार मौका देगी तो मैं देश के लिए लड़ूंगी- कविता
शहीद की पत्नी में है देश भक्ति का जज्बा
संभल। शहीद सुधीश कुमार की पत्नी कविता में देश भक्ति का जज्बा है। उनका कहना है कि अगर हिंदुस्तान की सरकार उन्हें मौका देगी तो वह भी देश के लिए लड़ेंगी। शहीद की पत्नी को सोमवार को भोर के वक्त पति की शहादत के बारे में जानकारी दी गई थी। तो पति की मौत के सदमे में बेहोश हो गईं। परिजनों के लिए उन्हें संभालना मुश्किल था। लेकिन जब उनसे बातचीत की गई तो उनके मुंह से यही निकला, मुझे अपने पति पर गर्व है। मैं भी देश के लिए लड़ूंगी।
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